अपने 100वें मिशन की तैयारी कर रहा इसरो, जानिए अंतरिक्ष में अब क्या करने वाला है लॉन्च
नई दिल्ली। चांद पर चंद्रयान उतारने और अंतरिक्ष में दो यानों को सफलता से जोड़कर भारत को ऐसी तकनीकी वाले गिने-चुने देशों में शामिल कराने वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अब 100वां मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। भारत के गणतंत्र बने 75 साल पूरे होने पर इसरो के वैज्ञानिक देशवासियों को नई तकनीकी देने जा रहे हैं। इसरो के वैज्ञानिक इसके लिए जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट के जरिए एनवीएस-02 उपग्रह को 29 जनवरी की सुबह अंतरिक्ष में भेजेंगे। इसरो का जीएसएलवी रॉकेट देश में बने क्रायोजेनिक इंजन के सहारे एनवीएस-02 उपग्रह को 48000 किलोमीटर ऊंचाई पर भू-स्थिर कक्षा में स्थापित करेगा। इस मिशन के लिए इसरो के वैज्ञानिकों ने 27 घंटे का काउंटडाउन शुरू किया है।
बीते दिनों ही वी. नारायणन ने इसरो के प्रमुख का कार्यभार संभाला है। ऐसे में इसरो का 100वां मिशन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। इसरो ने बताया है कि एनवीएस-02 उपग्रह से देश को क्या हासिल होना है। इसरो के अनुसार एनवीएस-02 उपग्रह देश के लिए आजाद क्षेत्रीय नेविगेशन के सिस्टम का हिस्सा बनेगा। ये भारत की जमीन से 1500 किलोमीटर दूर तक फैले इलाके में लोगों को उनकी सटीक स्थिति, समय और रफ्तार वगैरा बताएगा। एनवीएस श्रेणी के तहत इसरो पहले ही एक उपग्रह कक्षा में भेज चुका है। इस श्रेणी के तहत नेवीगेशन सर्विसेज के लिए कुल 5 उपग्रह भू-स्थिर कक्षा में भेजे जाने हैं।
जीएसएलवी रॉकेट से अंतरिक्ष में जो एनवीएस-02 उपग्रह इसरो के वैज्ञानिक भेजने जा रहे हैं, उसे यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने डिजाइन किया और बनाया है। इसका वजन 2250 किलोग्राम है। एनवीएस-02 उपग्रह में एल बैंड और एस बैंड के एंटीना हैं। इसमें सी बैंड का इस्तेमाल भी रेंज बताने के लिए किया गया है। एनवीएस-01 को 29 मई 2023 को इसरो के वैज्ञानिकों ने सफलता से अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था। ये NAVIC सेवा के तहत काम करेगा। जो पूरी तरह भारतीय जीपीएस प्रणाली होगी।
