February 15, 2026

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कौन थे नाहर सिंह? जिनके नाम पर नजफगढ़ को नाहरगढ़ करने की दिल्ली विधानसभा में उठी मांग

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में बीजेपी विधायक नीलम पहलवान ने नजफगढ़ का नाम नाहरगढ़ किए जाने की मांग उठाई और इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पेश किया। नजफगढ़ की विधायक ने दावा किया कि मुगलों ने नाहरगढ़ का नाम बदलकर नजफगढ़ कर दिया था। विधानसभा में बीजेपी विधायक नीलम पहलवान ने कहा कि हमने कई बार नजफगढ़ का नाम ‘नाहरगढ़’ करने की मांग उठाई है। प्रवेश वर्मा जी जब सांसद थे तब उनके माध्यम से भी हमने इस संबंध में कई प्रयास किए। हमारी मांग है कि नजफगढ़ को उसके असली नाम नाहरगढ़ से जाना जाए।

राजा नाहर सिंह ने 1857 के विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन्होंने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी और नजफगढ़ क्षेत्र को दिल्ली में शामिल कराया। बल्लभगढ़ के महाराज राम सिंह के पुत्र नाहर सिंह का जन्म 6 अप्रैल 1921 को हुआ था। सन 1839 में उनका राज्याभिषेक किया गया। राजा नाहर सिंह ने बहुत से मौकों पर अंग्रेजों से लोहा लिया था और कई बार उनको धूल चटाई थी। अपनी वीरता और बहादुरी के चलते राजा नाहर सिंह अंग्रेजों की आखों में खटकने लगे। अंग्रेजों ने राजा नाहर सिंह के खिलाफ एक षडयंत्र रचा। उन्होंने राजा नाहर सिंह को संधि का झांसा देकर दिल्ली के लाल किले बुलाया। जब नाहर सिंह वहां पहुंचे तो अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 9 जनवरी, 1858 को दिल्ली के चांदनी चौक में नाहर सिंह को फांसी दे दी गई।

वहीं मुगलों की सेना के सेनापति के नाम नजफ खान था जिसके नाम पर नाहरगढ़ का नाम नजफगढ़ किया गया। मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के लिए नजफ खान ने बहुत सी लड़ाइयां लड़ी थीं। इसी से खुश होकर शाह आलम ने नजफगढ़ क्षेत्र की कमान नजफ खान को सौंप दी। इसके बाद वहां किले का निर्माण कराया गया और सेनापति के नाम पर उस जगह का नाम नजफगढ़ कर दिया गया। दूसरी तरफ बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने अपनी विधानसभा में मोहम्मदपुर गांव का नाम बदलकर माधवपुरम रखने की मांग उठाई है।

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