February 15, 2026

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चंद्रयान-5 के लिए इसरो को मिली केंद्र सरकार की मंजूरी, जानिए किस वजह से ये मिशन साबित होगा अहम

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने चांद के लिए इसरो के चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। इससे पहले इसरो चांद पर चंद्रयान-4 भेजेगा। चंद्रयान-4 चांद की सतह से मिट्टी का नमूना लेकर धरती पर लौटेगा। वहीं, चंद्रयान-5 मिशन को इसरो जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा JAXA के साथ संयुक्त रूप से करेगा। चंद्रयान-5 मिशन भारत के लिए बहुत अहम है। इसकी कई वजह हैं। पहली वजह तो ये है कि चंद्रयान-5 मिशन में इसरो जिस लैंडर को चांद की सतह पर उतारेगा, उसका वजन करीब 26 टन होगा। जबकि, चंद्रयान-3 का लैंडर 2 टन से थोड़ा कम था। इसके अलावा इस लैंडर से जो रोवर निकलकर चांद पर चहलकदमी करेगा, उसका वजन भी 250 किलोग्राम होगा। जबकि, चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर का वजन 25 किलो ही था।

इसरो के चंद्रयान-5 मिशन को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर ही उतारने का कार्यक्रम है। ये रोवर जापान की अंतरिक्ष एजेंसी और इसरो संयुक्त रूप से तैयार करेंगे। चंद्रयान-5 इसलिए भी इसरो के लिए खास रहने वाला है, क्योंकि भारी लैंडर और रोवर के कारण रॉकेट का इंजन भी ज्यादा ताकतवर बनाना पड़ेगा। जबकि, चंद्रयान-3 को जीएसएलवी रॉकेट के जरिए इसरो ने अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया था। भारी वजन का लैंडर चांद पर उतारने से एक आसानी ये होगी कि इसके लुढ़क जाने की संभावना कम होगी। साथ ही चंद्रयान-5 के जरिए जो लैंडर भेजा जाएगा, उसका वजन ज्यादा होने के कारण उसमें लैंडिंग के वक्त इस्तेमाल होने वाला इंजन भी ज्यादा ताकतवर लगाना पड़ेगा।

चंद्रयान-5 मिशन को इसरो और जाक्सा 2028 या 2029 में लॉन्च कर सकते हैं। वहीं, चंद्रयान-4 को 2027 तक लॉन्च करने का इसरो का इरादा है। चंद्रयान-4 के जरिए इसरो दो यानों को अंतरिक्ष में जोड़ने का कारनामा भी करने वाला है। हाल ही में इसरो ने दो अलग-अलग यानों को धरती की कक्षा में जोड़ने के मिशन SPAdex को सफलता से पूरा कर चुका है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश है, जिसके पास अंतरिक्ष में दो यानों को जोड़ने और अलग करने की तकनीकी है।

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