‘एकता का अमृत’ महाकुंभ का सबसे पवित्र प्रसाद, लोकसभा में बोले पीएम नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में अपना संबोधन दिया। महाकुंभ का जिक्र करते हुए मोदी बोले, पूरे विश्व ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए। सबके प्रयास का यही साक्षात स्वरूप है। यह जनता जनार्दन का, जनता जनार्दन के संकल्पों के लिए, जनता जनार्दन की श्रद्धा से प्रेरित महाकुंभ था। महाकुंभ में हमने हमारी राष्ट्रीय चेतना के जागरण के विराट दर्शन किए हैं। मैं देश की जनता को नमन करता हूं, जिनकी वजह से महाकुंभ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। महाकुंभ की सफलता में कई लोगों की भूमिका रही। मैं सरकार और समाज के सभी कर्मयोगियों का आभार व्यक्त करता हूं।
मोदी ने कहा, महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। एकता का अमृत इसका सबसे पवित्र प्रसाद है। महाकुंभ एक ऐसा आयोजन रहा है, जिसमें देश के कोने से आए लोग एक हो गए। अपने अहंकार को किनारे रखकर, वे प्रयागराज में ‘मैं’ नहीं, बल्कि ‘हम’ की भावना से एकजुट हुए हैं। विभिन्न राज्यों के लोग पवित्र त्रिवेणी का हिस्सा बन गए हैं। जब विभिन्न क्षेत्रों के लाखों लोग राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करते हैं, तो देश की एकता बढ़ती है। जब विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग संगम के तट पर ‘हर हर गंगे’ का नारा लगाते हैं, तो यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है और एकता की भावना को बढ़ाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, महाकुंभ ने हमें कई तरह से प्रेरित किया है। हमारे देश में कई छोटी-बड़ी नदियां हैं और उनमें से कई संकट का सामना कर रही हैं। कुंभ से प्रेरणा लेते हुए हमें नदी महोत्सवों की परंपरा का विस्तार करना चाहिए। हमें इस बारे में जरूर सोचना चाहिए, क्योंकि इससे मौजूदा पीढ़ी को पानी का महत्व समझने में मदद मिलेगी। इससे हमारी नदियों की सफाई और सुरक्षा के प्रयासों को बल मिलेगा। आज भारत का युवा गर्व के साथ अपनी परंपराओं, आस्था और विश्वासों को अपना रहा है।
