संसद भवन की जमीन पर भी दावा कर रहा था वक्फ, सदन में वक्फ संशोधन बिल पेश करते हुए बोले किरेन रिजिजू
नई दिल्ली। लोकसभा में आज केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ (संशोधन) बिल 2024 को पेश किया। बिल के साथ सभी संशोधनों को भी सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। वक्फ संशोधन विधेयक पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने वक्फ के असीमित अधिकारों के दुरुपयोग की चर्चा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 1970 से चल रहा एक मामला CGO कॉम्प्लेक्स और संसद भवन समेत कई संपत्तियों से जुड़ा है। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति बताया था। मामला कोर्ट में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने 123 संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था। अगर हमने आज यह संशोधन पेश नहीं किया होता, तो हम जिस संसद भवन में बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा रहा था। अगर पीएम मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती, तो कई संपत्तियां गैर-अधिसूचित हो चुकी होतीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, रेलवे ट्रैक, स्टेशन और बुनियादी ढांचा पूरे राष्ट्र का है, न कि केवल भारतीय रेलवे का। हम रेलवे की संपत्ति की तुलना वक्फ संपत्ति से कैसे कर सकते हैं? इसी तरह, रक्षा भूमि, जिसके बाद देश में दूसरी सबसे ज्यादा भूमि है वराष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण के लिए है, इसकी तुलना वक्फ भूमि से कैसे की जा सकती है? बहुत सी वक्फ संपत्तियां वास्तव में निजी संपत्तियां हैं। यही कारण है कि दुनिया में सबसे बड़ी वक्फ संपत्ति भारत में है।
रिजिजू ने कहा कि वक्फ विधेयक में कुछ विसंगतियां थीं, इसलिए इसमें संशोधन करना जरूरी था। उन्होंने कांग्रेस की बात करते हुए कहा कि आपने कहा था कि कोई भी भारतीय वक्फ बना सकता है, लेकिन 1995 में ऐसा नहीं था। 2013 में आपने इसमें बदलाव किए और अब हमने 1995 के प्रावधान को बहाल कर दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि केवल वही व्यक्ति वक्फ बना सकता है जिसने कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन किया हो।
