April 25, 2026

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कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल, उठा दिया ये अहम मुद्दा

प्रयागराज। जस्टिस यशवंत वर्मा को पद की शपथ लेने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हुई है। वकील विकास चतुर्वेदी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। जनहित याचिका में अहम मुद्दा उठाते हुए मांग की गई है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को जस्टिस यशवंत वर्मा को शपथ दिलाने से रोका जाए। बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से 14 मार्च को बड़ी तादाद में करेंसी नोट मिलने का आरोप है। जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट ने बिठाई है और इसी वजह से जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों ने जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर का विरोध भी किया था और इस मसले पर दो दिन हड़ताल रखी थी।

विकास चतुर्वेदी ने जस्टिस यशवंत वर्मा के संबंध में दाखिल जनहित याचिका में कहा है कि उनका ट्रांसफर और शपथ संविधान का उल्लंघन करते हैं। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न दिया जाए। ऐसे में वो क्या शपथ लेंगे? विकास चतुर्वेदी की जनहित याचिका में ये भी कहा गया है कि जज अपने दफ्तर में किए जाने वाले काम के बारे में शपथ लेता है। ऐसे में जस्टिस वर्मा को काम न देने के बावजूद अगर शपथ दिलाई जाती है, तो ये संवैधानिक पवित्रता को कमजोर करता है और प्रक्रिया को महज औपचारिकता तक सीमित कर देता है।

याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में ये तर्क दिया है कि किसी न्यायाधीश को तब तक काम करने से मना नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे राष्ट्रपति के आदेश से पद से हटा न दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट इसकी पुष्टि करता है कि जैसा कि अन्य जजों के बारे में है कि जस्टिस वर्मा को काम दिया जाएगा, तो याचिकाकर्ता को उनके शपथ पर कोई आपत्ति नहीं है। याचिका दाखिल करने वाले विकास चतुर्वेदी ने ये भी कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रोस्टर के मास्टर हैं और जजों को काम के आवंटन का फैसला करने के लिए जिम्मेदार हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की कोई भूमिका नहीं होती है। यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हाईकोर्ट के किसी जज को काम देने से रोक नहीं सकते।