June 1, 2026

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रूस से तेल खरीदने वालों पर भारी टैक्स लगाने की तैयारी में अमेरिका

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की वाशिंगटन में हुई प्रेस वार्ता ने भारत-अमेरिका संबंधों की परिपक्वता, वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और समसामयिक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। इस प्रेस वार्ता में उन्होंने भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं, सामरिक संतुलन, व्यापारिक संबंधों और Global South के साथ भारत की प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया साथ ही यह भी बताया कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका जो भारी भरकम टैक्स लगाने की तैयारी में है उसको लेकर भारत का रुख क्या है। प्रेस वार्ता के दौरान जयशंकर ने भारत पाकिस्तान, भारत चीन संबंधों और राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से युद्धविराम कराने के बार-बार किये जा रहे दावे के संबंध में भी सवालों के जवाब दिये।

स वार्ता को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह तकनीकी सहयोग, रक्षा विनिर्माण, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक शासन संरचनाओं में सुधार जैसे विविध क्षेत्रों में विस्तार पा चुके हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच साझा मूल्य और पारस्परिक सम्मान इस रिश्ते की आधारशिला हैं।

प्रेस वार्ता में एक प्रमुख बिंदु यह रहा कि भारत Global South के हितों की प्रभावी ढंग से वकालत कर रहा है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन विकासशील देशों के लिए भी बोल रहा है जिन्हें अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनदेखा कर दिया जाता है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान Global South के मुद्दों को प्राथमिकता देना इसी नीति का प्रमाण है।

चीन के संदर्भ में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में जयशंकर ने संयमित लेकिन स्पष्ट रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय स्थायित्व का पक्षधर है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्रता और कानून आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए अमेरिका और अन्य समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग करता रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में जयशंकर ने दोहराया कि भारत युद्ध का पक्ष नहीं लेता बल्कि शांति और संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है। उन्होंने बताया कि भारत ने मानवीय सहायता के रूप में यूक्रेन को कई सहायता पैकेज भेजे हैं और युद्ध की विभीषिका से प्रभावित देशों की सहायता के लिए तत्पर है।

जयशंकर ने प्रेस वार्ता में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की विदेश नीति ‘भारत पहले’ (India First) के सिद्धांत पर आधारित है। भारत किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनता बल्कि मुद्दा आधारित साझेदारी में विश्वास रखता है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता है, न कि किसी दबाव में।

इसके अलावा जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ अपनी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को साझा कर दिया है। हम आपको बता दें कि ग्राहम ही उस विधेयक को लाये हैं जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों— विशेषकर भारत और चीन पर 500% तक आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। जयशंकर ने कहा, “हमने अपनी चिंताएं और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े हित उनके समक्ष रखे हैं। यदि यह स्थिति आती है, तो हम उसका समाधान ढूंढ़ने का प्रयास करेंगे।” हम आपको बता दें कि इस विधेयक को ट्रंप प्रशासन का भी समर्थन प्राप्त है। यह विधेयक यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने के लिए लाया गया है। परंतु इससे भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 40-45% रूसी तेल से पूरा करते हैं, वह भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

 

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