सैफ अली खान की 15000 करोड़ रुपये की पैतृक संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ हुई घोषित
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सैफ अली खान को झटका देते हुए अभिनेता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने राज्य में उनकी 15,000 करोड़ रुपये की पैतृक संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ के रूप में चिह्नित करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने वर्ष 2000 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सैफ अली खान, उनकी बहनों सोहा और सबा तथा मां शर्मिला टैगोर को पैतृक संपत्तियों का उत्तराधिकारी माना गया था।
न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को संपत्ति उत्तराधिकार विवाद पर नए सिरे से सुनवाई करने तथा एक वर्ष की समय-सीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया है। शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत केंद्र सरकार को वर्ष 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए व्यक्तियों के स्वामित्व वाली संपत्तियों पर दावा करने की अनुमति है।
पटौदी परिवार ने भोपाल और रायसेन में अपनी ज़मीनों पर दावा किया है, जिसमें कोहेफ़िज़ा का फ़्लैग हाउस, अहमदाबाद पैलेस, रायसेन के चिकलोद में स्थित कोठी और जंगल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नूर-ए-सबा, फ़्लैग हाउस, दार-उस-सलाम, फ़ोर क्वार्टर, न्यू क्वार्टर, फ़ारस खाना, कोहेफ़िज़ा और अहमदाबाद पैलेस जैसी संपत्तियाँ उनकी हैं।
ये हैं मुख्य अपडेट-
-यह मामला बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान से जुड़ा है, क्योंकि यह संपत्ति उनकी परदादी साजिदा सुल्तान से जुड़ी है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पूरी संपत्ति साजिदा सुल्तान को दे दी थी।
-हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि वह मामले की दोबारा सुनवाई करे और एक साल के अंदर नया फैसला दे। नवाब हमीदुल्ला खान के अन्य परिजनों ने पुराने फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत संपत्ति का न्यायसंगत बंटवारा करने की मांग की है।
-गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने पूरी पुश्तैनी संपत्ति नवाब की बड़ी बेगम की बेटी साजिदा सुल्तान को दे दी थी, जिसे अब अन्य उत्तराधिकारियों ने चुनौती दी है।
-हाईकोर्ट के वकील हर्षित बारी के मुताबिक, मामले की दोबारा सुनवाई होगी और नए फैसले से तय होगा कि नवाब की अरबों की संपत्ति का हक किसे और कितना मिलना चाहिए।
