February 15, 2026

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ट्रेनों में बम धमाके के आरोपियों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को महाराष्ट्र एटीएस ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

नई दिल्ली। महाराष्ट्र पुलिस के एटीएस ने साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके के आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। महाराष्ट्र एटीएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 24 जुलाई 2025 को सुनवाई करेगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सभी 11 आरोपियों को सबूत न होने की बात कहकर बरी कर दिया था। एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है। मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके के आरोपियों को बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से बरी किए जाने पर सवाल उठ रहे थे। बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कहा था कि एटीएस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देगी।

मुंबई की लोकल ट्रेनों में 7 बम ब्लास्ट हुए थे। ट्रायल कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को दोषी माना था। वहीं, घटना के 19 साल बाद फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने बम धमाके में इस्तेमाल आरडीएक्स और अन्य चीजों के बारे में अदालत में पुख्ता वैज्ञानिक सबूत मुहैया नहीं कराए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि आरोपियों से जबरन पूछताछ कर पुलिस ने बयान लिए। जो कानून के तहत मान्य नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए अहम बात ये भी कही कि ट्रेनों में बम धमाका मामले के कई गवाहों ने पहले चुप्पी बनाए रखी और फिर अचानक आरोपियों की पहचान की। कोर्ट ने गवाहों के इस बर्ताव को असामान्य माना। साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की ओर से पेश कई गवाहों पर ये कहते हुए सवाल उठाया कि वे पहले भी ऐसे ही मामलों में कोर्ट में पेश हो चुके थे। जिस वजह से इन गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।

मुंबई में 11 जुलाई 2006 की शाम को लोकल ट्रेनों में 7 धमाके हुए थे। महज 11 मिनट में सीरियल बम धमाकों से मुंबई में अफरातफरी मच गई थी। लोकल ट्रेनों में हुए इन बम धमाकों में 189 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 800 से ज्यादा यात्री घायल हुए थे। महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 15 अन्य फरार घोषित हुए थे। फरार आरोपियों में से ज्यादातर के पाकिस्तान में होने की बात कही गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एक अन्य को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

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