‘संविधान ने दी है हमें नागरिकता तय करने की शक्ति’ बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इन तर्कों के साथ सही बताया
नई दिल्ली। बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण SIR के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। चुनाव आयोग ने कई बिंदुओं के जरिए वोटरों के पुनरीक्षण को सही बताया है। चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि आधार सिर्फ व्यक्ति की पहचान करता है। साथ ही उसने कहा है कि फर्जी राशन कार्ड भी बनता है। ऐसे में इसे दस्तावेज नहीं रख सकते। पुराने वोटर पहचान पत्र के बारे में कहा है कि इसे मान्य करने से पूरी प्रक्रिया गड़बड़ हो सकती है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ये भी कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 में उसे नागरिकता तय करने की शक्ति दी गई है।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा है कि वोटरों के विशेष पुनरीक्षण का मकसद है कि कोई भी अपात्र वोट न डाल सके और एक भी पात्र व्यक्ति न छूटे। चुनाव आयोग ने कहा है कि वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ जिन्होंने याचिका दाखिल की है, उनके पास पुराने आंकड़े हैं और मौजूदा स्थिति को ये आंकड़े नहीं दिखाते हैं। चुनाव आयोग ने ये भी कहा है कि जिन राजनीतिक दलों के लोगों ने वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ याचिका दी है, वे दल भी इस प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। आयोग का ये भी कहना है कि याचिका देने वालों ने कोर्ट से कई तथ्य भी छिपाए हैं। वे अखबारों में छपी रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, जो भरोसेमंद नहीं माने जा सकते।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ये भी कहा है कि अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं आता, तो उसकी नागरिकता किसी तरह खतरे में नहीं पड़ती है। चुनाव आयोग ने बताया है कि वोटरों के विशेष पुनरीक्षण पर जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। साथ ही उसने कहा है कि इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को समय से पहले ही दाखिल किया गया। चुनाव आयोग ने ये भी कहा है कि जिनके भी नाम 2003 के वोटर लिस्ट में हैं, उनका सत्यापन हो चुका है। उनको किसी तरह का दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। बिहार में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण 25 जुलाई तक होगा। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को सुनवाई होनी है।
