बीएसएनएल गाजियाबाद के बेखौफ अधिकारियों ने संचार मंत्री को भेजी झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट
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रविन्द्र बंसल प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़
बीएसएनएल गाजियाबाद के बेखौफ अधिकारियों ने संचार मंत्री को भेजी झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट
राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर द्वारा बीएसएनएल गाजियाबाद के महाप्रबंधक के विरुद्ध की गई थी शिकायत
सुभाष चंद्र महाप्रबंधक द्वारा झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट उच्च अधिकारियों की स्थिति को बना सकती है असहज
संचार मंत्री को झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट भेजने वालों के विरुद्ध की जानी चाहिए सख्त कार्यवाही
-कर्मवीर नागर प्रमुख
गाजियाबाद । अब तक प्रायः देखने में आता था कि आइजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायतों का गोल-मोल जवाब देकर इति श्री कर दी जाती है, लेकिन हैरान कर देने का विषय यह है कि बीएसएनएल बिजनेस एरिया गाजियाबाद के प्रधान महाप्रबंधक के विरुद्ध खराब सेवाओं, खराब व्यवहार, अलीगढ़ की अधिकारियों को धमकी देने और मकान किराया भत्ता लेने में की गई अनियमितताओं के संबंध में सुरेंद्र सिंह नागर राज्यसभा सांसद द्वारा संचार मंत्री को पत्र भेज कर शिकायत की गई थी जो रोस्टर के तहत उपसभापति के रूप में राज्यसभा सदन की कार्यवाही संचालित कर रहे हैं। लेकिन इन सब बातों से बेखौफ सुभाष चंद्र महाप्रबंधक एवं उसके मातहत अधिकारियों ने दिए गए शिकायत के जवाब में गाजियाबाद में बीएसएनएल मोबाइल की खराब सेवाओं को तो स्वीकार लिया। लेकिन मकान किराया भत्ता लेने में अनियमितता करने का दिया गया मिथ्या जवाब बहुत ही स्तब्ध कर देने वाला है। क्योंकि सुभाष चंद्र महाप्रबंधक ने 17 फरवरी 2023 से 11 अगस्त 2023 तक दिल्ली स्थित विभागीय क्वार्टर में रहते हुए और दिल्ली गाजियाबाद अप डाउन करने के लिए विभागीय वाहन का इस्तेमाल करते हुए बीएसएनएल से मकान किराया भत्ता भी लिया है जिसके पुख्ता प्रमाण हैं। इसी तरह प्रधान महाप्रबंधक सुभाष चंद्र ने कंपोजिट ट्रांसफर ग्रांट भी 180 दिन की अवधि बीत जाने के बाद क्लेम की थी जिसका क्लेम संख्या- 21371 दिनांक-11-08-2023 और क्लेम की धनराशि 1,64,480 रुपए थी।
जबकि मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया डिपार्टमेंट ऑफ़ एक्सपेंडिचर नॉर्थ ब्लॉक नई दिल्ली के दिनांक 15 जून 2021 के नियम संख्या- 19030/2017- ईआईवी के अनुसार 180 दिन की अवधि बीत जाने के बाद कंपोजिट ट्रांसफर ग्रांट का भुगतान नियमों के दायरे में नही आता है। सरकारी मकान में रहते हुए मकान किराया भत्ता लेने एवं समयावधि बीत जाने के बाद ट्रांसफर ग्रांट लेने के सभी साक्ष्य बीएसएनएल गाजियाबाद के अकाउंट सेक्शन के दस्तावेजों में दर्ज हैं। जिन्हें जान पूछ कर छिपाया जा रहा है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि गाजियाबाद के प्रधान महाप्रबंधक कार्यालय द्वारा मकान किराया भत्ता लेने में की गई अनियमितता के संबंध में झूठे तथ्यों पर आधारित संचार मंत्री को भेजी गई यह रिपोर्ट जो संचार मंत्री ने सुरेंद्र सिंह सांसद के पत्र के जवाब में खुद हस्ताक्षर करके भेजी है अगर यह रिपोर्ट किसी विपक्षी पार्टी के सांसद को मिल जाए तो संचार मंत्री के लिए सदन में असहज स्थिति उत्पन्न कर सकती है। इसी तरह बुलंदशहर में “दिशा” की बैठक में उपस्थित न होने का जवाब भी बिल्कुल झूठे तथ्यों पर आधारित है, क्योंकि जिन दिनों बुलंदशहर में आयोजित “दिशा” की बैठक में सुभाष चंद्र महाप्रबंधक ने उपस्थित होना मुनासिब नहीं समझा था उन दिनों तक “दिशा” की बैठकों में महाप्रबंधक को उपस्थित होने के ही विभागीय आदेश थे। यह बताना अनिवार्य होगा कि दिशा की बैठकों में ऑपरेशनल एरिया हेड के उपस्थित होने का आदेश बुलंदशहर में आयोजित “दिशा” की उस बैठक के बाद जारी किया गया था जिसमें सुभाष चंद्र महाप्रबंधक के उपस्थिति न होने से नाराज बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह ने शिकायत की थी।
इसी तरह सुभाष चंद्र महाप्रबंधक द्वारा अलीगढ़ के अधिकारियों को बाहर की बदमाशों से पिटवाने और एनकाउंटर कराने की खुली धमकी देने के संबंध में सुरेंद्र सिंह नागर सांसद द्वारा की गई शिकायत का संचार मंत्री को भेजा गया जवाब तो ऐसा खुल्लम-खुल्ला झूठ है क्योंकि सुभाष चंद्र महाप्रबंधक द्वारा अधिकारियों को बदमाशों से पिटवाने और एनकाउंटर कराने का ऑडियो तो देश के बहुत से लोगों ने टीवी चैनल पर सुना, महाप्रबंधक का धमकी भरा ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, अखबारों में प्रकाशित खबरों में पढ़ा और तो और अलीगढ़ के अधिकारियों को बाहर के बदमाशों से पिटवाने, गाली गलौज करने और एनकाउंटर कराने की धमकी देने के विरुद्ध अधिकारियों के एक संगठन द्वारा उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की गई थी और इतना ही नहीं इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इस प्रकरण में सुभाष चंद्र महाप्रबंधक द्वारा लिखित रूप से माफी भी मांगी गई थी। लेकिन असल सच्चाई तो यह है कि सुभाष चंद्र महाप्रबंधक ने कोड ऑफ़ कंडक्ट का वायलेशन किया है ।असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और कानून की दृष्टि में अपराधिकृत किया। लेकिन फिर भी संचार मंत्री को भेजे गए जवाब में इतना बड़ा झूठ लिख दिया गया कि अलीगढ़ के विषय में ऐसी कोई शिकायत नहीं है। इतना ही नहीं अलीगढ़ के जिन अधिकारियों को काम के बहाने धमकी दी गई थी उन अधिकारियों से सांठ गांठ होने के बाद उन्हें ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में मनचाही जगह पर तबादला कर दिया गया। गाजियाबाद के प्रधान महाप्रबंधक सुभाष चंद्र ने सुरेंद्र सिंह नागर सांसद की शिकायत पर संचार मंत्रालय से मांगी गई रिपोर्ट देने में भी प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया है क्योंकि यह रिपोर्ट प्रधान महाप्रबंधक के हस्ताक्षर से संचार मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए थी क्योंकि सांसद के पत्र का जबाब माननीय संचार मंत्री महोदय के हस्ताक्षरित पत्र द्वारा भेजा गया है। लेकिन इसमें भी सुभाष चंद्र महाप्रबंधक ने अपने बचाव करने के लिए बहुत बड़ी चालाकी का इस्तेमाल किया है ताकि झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट की शिकायत होने पर रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले नरेंद्र कुमार मलिक नामक एजीएम को झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके।
लेकिन गाजियाबाद के महाप्रबंधक ने नरेंद्र कुमार मलिक नामक एजीएम को तो बलि का बकरा बना ही दिया लेकिन इसमें सबसे अहम बात तो यह है कि खुद को बचाने के लिए सांसद की शिकायत के जवाब में झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट भेज कर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी क्योंकि किसी भी सांसद को मंत्री द्वारा हस्ताक्षरित पत्र के माध्यम से जवाब देने के बाद असली जवाब देही मंत्री की हो जाती है। अगर झूठे तथ्यों पर आधारित सुभाष चंद्र महाप्रबंधक की यह रिपोर्ट किसी विपक्षी सांसद द्वारा साक्ष्यों के सहित सदन के पटल पर रख दी गई तो संचार मंत्री के लिए असहज स्थिति उत्पन्न कर सकती है। इसलिए गाजियाबाद के प्रधान महाप्रबंधक एवं झूठे तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट भेजने में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित करना चाहिए और सुरेंद्र नागर सांसद के पत्र में उल्लिखित शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि यह भी जांच का गंभीर विषय है कि सुभाष चंद्र महाप्रबंधक खुद के विरुद्ध जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई बड़ी-बड़ी शिकायतों और उनकी जांच रिपोर्ट को डंप कराने में माहिर हैं तभी तो मदन भैया विधायक खतौली द्वारा जनवरी माह 2025 में की गई शिकायत पर सलीम बेग नामक महाप्रबंधक की चेयरमैनशिप में तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच कमेटी द्वारा की गई लगभग 50 पन्ने की जांच रिपोर्ट को सुभाष चंद्र महाप्रबंधक ने बीएसएनएल मुख्यालय में अपनी पहुंच, पकड़ और आकाओं और संरक्षण दाताओं के जरिए डंप करा दिया है। क्योंकि सुभाष चंद्र के कमेंट्स लेने के लिए उक्त जांच रिपोर्ट को ज्यों का त्यों सुभाष चंद्र के पास भेज दिया गया था जिससे सुभाष चंद्र महाप्रबंधक को स्पष्ट हो गया था कि मदन भैया के पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच साक्ष्यों सहित पूरी तरह उसके विरुद्ध है इसीलिए तो इस जांच रिपोर्ट को डंप करा दिया गया और आज तक संचार मंत्री को प्रेषित मदन भैया विधायक के पत्रों का जवाब और जांच कमेटी की जांच रिपोर्ट को खुलासा तक नहीं दिया गया। इतना ही नहीं पता तो यहां तक भी चला है कि सुभाष चंद्र महाप्रबंधक के विरुद्ध शिकायत की जांच हेतु गठित कमेटी के चैयरमेन सलीम बेग नामक महाप्रबंधक को उस स्थिति में केरल तबादला करा दिया गया जबकि सलीम बेग महाप्रबंधक को यूपी वेस्ट के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक द्वारा राजस्व वृद्धि में अच्छी परफॉर्मेंस के लिए पारितोषक से नवाजा गया था और वैसे भी सलीम बेग महाप्रबंधक अपने सर्विस काल में दो बार हार्डकोर टेन्योर स्टेशन पर सेवारत रह चुके हैं।
इसलिए मदन भैया विधायक खतौली के पत्र पर हुई जांच रिपोर्ट के अब तक खुलासा मैं करने के पीछे के कारणों की जांच, सलीम बेग महाप्रबंधक के तबादले के कारणों की जांच, गाजियाबाद में सुभाष चंद्र द्वारा काम करने के माहौल को खराब की जांच, अधिकृत अधिकारी की प्रायर अप्रूवल के बगैर दूरभाष केंद्र राजनगर की इमारत में सीसीटीवी कैमरे और मॉनिटर लगवाने की जांच, राजीव कुमार नामक मंडल अभियंता के कक्ष में नियम विरुद्ध एयर कंडीशन लगवाने की जांच, संचार निगम एग्जीक्यूटिव एसोसिएशन को आबंटित कार्यालय को डिमोलिश कराने के आदेश देने के पीछे के कारणों की जांच और सुरेंद्र सिंह नागर सांसद के शिकायती पत्र के जवाब में संचार मंत्री को गलत तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट भेजने की जांच सीवीसी, विभागीय विजिलेंस अथवा उच्च स्तरीय कमेटी गठित करके कराना अत्यंत अनिवार्य है अन्यथा सुभाष चंद्र महा प्रबंधक खुद को बचाने के चक्कर में उच्च अधिकारियों और संचार मंत्री तक की फजीहत करा सकता है जैसा कि सुरेंद्र सिंह नागर सांसद के पत्र के जवाब से स्पष्ट हो गया है क्योंकि सुरेंद्र नागर सांसद और मदन भैया विधायक जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों द्वारा सुभाष चंद्र महाप्रबंधक के विरुद्ध लगाए गए आरोप बिल्कुल सही हैं। निष्पक्ष जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा। हालांकि मदन भैया के पुत्र की जांच हेतु गठित कमेटी द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट की खुलासा करने से ही सुभाष चंद्र के असली कारनामे उजागर होने में देर नहीं लगेगी। उच्च अधिकारियों से बेखौफ सुभाष चंद्र महा प्रबंधक की झूठी रिपोर्ट देने की बदनीयति, दबाव और प्रभाव को मद्देनजर नजर रखते हुए इसके कारनामों की शिकायत बीएसएनएल विजिलेंस, डीओटी विजिलेंस, केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई को भी की गई है हालांकि बीएसएनएल विजिलेंस के जांच अधिकारी को भी निष्पक्ष जांच करते देख इसने तबादला करा दिया लेकिन उम्मीद है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई जांच इसके सभी काले कारनामों की पोल खोल कर रख देंगे।
