बिहार की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना चाहते हैं? इस खबर को पढ़कर अपने बीएलओ से फटाफट करें संपर्क
पटना। बिहार में चुनाव आयोग ने वोटरों का विशेष पुनरीक्षण (SIR) करवाया है। इस पुनरीक्षण में चुनाव आयोग ने वोटरों के सामने ये विकल्प दिया था कि जिनके नाम 2003 की वोटर लिस्ट में है, उनको कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। जिन लोगों का नाम इस लिस्ट में नहीं, उनके लिए चुनाव आयोग ने 11 दस्तावेजों में से एक देने का विकल्प रखा था। इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक जिन लोगों ने बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा, उनमें से 15 से 20 फीसदी ने इन 11 में से एक भी दस्तावेज नहीं दिया है। इससे उनका नाम बिहार की वोटर लिस्ट में जुड़ने में दिक्कत आ गई। अखबार के मुताबिक ऐसे लोगों के लिए बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने नई व्यवस्था की है।
अखबार के मुताबिक बिहार के जिन वोटरों के पास चुनाव आयोग की ओर से मंजूर 11 में से कोई दस्तावेज नहीं, उनको बीएलओ ने एक और विकल्प दिया है। अगर वोटर ये साबित कर देता है कि उसके पिता, मां, दादा, दादी या परिवार के किसी सदस्य का नाम बिहार की वोटर लिस्ट में है, तो वो उसकी जानकारी देकर बीएलओ को आवेदन कर सकता है। अखबार ने कई बूथ लेवल अफसरों के हवाले से बताया है कि बिहार के सभी 38 जिलों के चुनाव अधिकारियों ने इस तरह की व्यवस्था से लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने को कहा है। ये व्यवस्था इस तरह है कि अगर कोई परिवार के सदस्य का हवाला देकर अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन करता है, तो फॉर्म पर संबंधित पारिवारिक वोटर के दस्तखत कराने होंगे। अगर परिवार के उस सदस्य की मौत हो गई है, तो उसकी जानकारी और वोटर लिस्ट के उस हिस्से की फोटोकॉपी देनी होगी, जिसमें उसका नाम था।
बिहार में चुनाव आयोग ने एसआईआर का पहला चरण खत्म कर लिया है। 1 सितंबर तक लोग दावा, आपत्तियां और नया आवेदन दे सकते हैं। इसके बाद सितंबर के अंत तक बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आयोग नई वोटर लिस्ट जारी करेगा। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उन 65 लाख लोगों के नाम भी जारी किए हैं, जिनकों बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाया गया है। जिला स्तर पर जारी लिस्ट में ये भी बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से आखिर हटाया क्यों गया है।
