बहुविवाह के खिलाफ असम विधानसभा में विधेयक पारित, 7 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने यूसीसी को लेकर किया बड़ा ऐलान
नई दिल्ली। असम में बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए आज प्रदेश विधानसभा में असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 पारित कर दिया गया। अब नए कानून के तहत अगर कोई शख्स पहली शादी के वैध रहते दूसरी शादी करता है तो उसे सात साल की जेल की सजा हो सकती है। साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक पारित होने पर कहा, असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 के माध्यम से, हम कानूनी सुरक्षा, कठोर दंड और वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे। नारीशक्ति के लिए न्याय की दिशा में यह एक मजबूत कदम है।
सीएम ने कहा कि असम संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, महिलाओं के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं राज्य विधानसभा द्वारा असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025 पारित किए जाने से पहले, सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम बहुविवाह को बढ़ावा नहीं देता। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो आपको सच्चा मुसलमान होने का मौका मिलेगा। यह विधेयक इस्लाम के विरुद्ध नहीं है। सच्चे इस्लामी लोग इस अधिनियम का स्वागत करेंगे। तुर्की जैसे देशों ने भी बहुविवाह पर प्रतिबंध लगा दिया है, पाकिस्तान में एक मध्यस्थता परिषद है।
इसके साथ ही सीएम ने यह भी कहा कि अगर मैं मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा विधानसभा में वापस आता हूं, तो मैं अगली सरकार में विधानसभा के पहले सत्र में ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाऊंगा। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाऊंगा। बहुविवाह विरोधी अधिनियम असम में यूसीसी की ओर पहला कदम है। आपको बता दें कि बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 के प्रावधानों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के सदस्यों और छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है।
