असम के मुस्लिम बहुल 8 जिलों में वोटरों की तादाद बढ़ी, सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने पहले ही जताई थी आशंका
गुवाहाटी। असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने बीते दिनों आशंका जताई थी कि राज्य में मुस्लिमों की तादाद लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में ये मुस्लिम बहुल हो जाएगा। हिमंत बिस्व सरमा की ये आशंका अब सच होती दिख रही है। अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक असम में वोटरों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जो फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई है, उसमें मुस्लिम बहुल 8 जिलों में वोटरों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है। जबकि, आदिवासी बहुल इलाकों में वोटर घटे हैं।
एसआईआर के बाद आई असम की फाइनल वोटर लिस्ट के मुताबिक 35 जिलों में से 10 जिलों में वोटरों की संख्या में इजाफा हुआ है। इनमें मुस्लिम बहुल धुबरी, गोआलपाड़ा, बारपेटा, नगांव, मोरीगांव, बोंगाईगांव, हैलाकांदी और दक्षिण सलमारा जिले हैं। इनके अलावा माजुली में 209 और बजाली जिले में 1300 वोटर बढ़े हैं। इन दोनों जिलों में मुस्लिमों की तादाद कम है। यानी इन दोनों जिलों में वोटरों की तादाद में बहुत कम बढ़ोतरी हुई है। असम की फाइनल वोटर लिस्ट के हिसाब से मुस्लिम बहुल बारपेटा जिले में सबसे ज्यादा 28625 नए वोटर जुड़े हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल श्रीभूमि (करीमगंज) में 31000 वोटर घटे हैं।
एक तरफ जहां असम के मुस्लिम बहुल जिलों में वोटरों की तादाद बढ़ी है। वहीं, असम के सोनितपुर, गोलाघाट, जोरहाट, लखीमपुर, दरांग और उदालगुड़ी में वोटर घटे हैं। इन जिलों में असम के मूल आदिवासी रहते हैं। गुवाहाटी और कामरूप मेट्रो जिलों में 25000 से ज्यादा वोटर कम हुए हैं। कामरूप ग्रामीण में भी 25000 से ज्यादा वोटरों की संख्या घटी है। नलबाड़ी, बक्सा/तमुलपुर, बिस्वनाथ जिलों में भी वोटरों की संख्या में गिरावट आई है। असम में साल 2011 की जनगणना के मुताबिक 34 फीसदी मुस्लिम हुआ करते थे। असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने दावा किया है कि राज्य की मुस्लिम आबादी बढ़कर 40 फीसदी हो गई है। उनका ये भी दावा है कि साल 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य हो सकता है।
