संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट से पाकिस्तान फिर बेनकाब, लाल किला बम धमाके में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया गया
नई दिल्ली। भारत में आतंकवाद फैलाने के मामले में पाकिस्तान फिर बेनकाब हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में लाल किला के पास कार बम धमाके में पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 की शाम धमाका हुआ था। जिसमें 15 लोगों की जान गई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि जैश ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध कमेटी की रिपोर्ट में पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को हाल में हुए कई आतंकी हमलों का जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट में एक देश ने ये भी कहा है कि जैश निष्क्रिय है। माना जा रहा है कि ये बात पाकिस्तान ने कही है। सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जैश जुड़ा रहा है। वैसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को 1990 के दशक से आतंकी संगठन अल-कायदा से रिश्तों के कारण प्रतिबंधित किया गया था। जैश का चीफ मौलाना मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित है। लाल किला के पास कार बम धमाके में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर उमर उन नबी का नाम आया था। वो भी कार बम धमाके में मारा गया था।
10 नवंबर 2025 को लाल किला धमाके के दिन सुबह ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अल-फलाह के दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक के ठिकाने से बड़ी तादाद में विस्फोटक बनाने का सामान बरामद किया गया था। दूसरी महिला डॉक्टर शाहीन सईद को भी जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पकड़ा था। इससे पहले श्रीनगर से एक डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई थी। उसके लॉकर से एके-47 रायफल बरामद की गई थी। एनआईए की जांच में पता चला कि डॉक्टरों का गुट आतंकी वारदात करने के लिए काफी समय से सक्रिय था। इस मामले में अभी एनआईए की जांच जारी है। जम्मू-कश्मीर से दो मौलवी भी टेरर मॉड्यूल का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दिल्ली के लाल किला के पास बम धमाका हुआ था।
