पश्चिम बंगाल में एसआईआर को और पुख्ता करने के लिए चुनाव आयोग का बड़ा कदम, कई विशेष पर्यवेक्षक किए नियुक्त
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में एसआईआर यानी वोटरों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर नजर रखने के लिए कई स्पेशल पर्यवेक्षक भेजे हैं। चुनाव आयोग के ये विशेष पर्यवेक्षक यानी ऑब्जर्वर जिलों के ईआरओ और डीईओ की ओर से एसआईआर के किए जा रहे काम पर नजर रखेंगे। इससे पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को संविधान के अनुच्छेद 326(2) के तहत वोटर लिस्ट संबंधी विशेष पर्यवेक्षक बनाया था। चुनाव आयोग ने कहा था कि विशेष पर्यवेक्षक पर उसके निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी है। साथ ही डीजीपी से एसआईआर पर लगातार रिपोर्ट देते रहने के लिए चुनाव आयोग ने कहा था।
चुनाव आयोग ने रिटायर्ड आईएएस सुब्रत गुप्ता को पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए स्पेशल रोल ऑब्जर्वर बनाया है। वो पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के अफसर रहे हैं। सुब्रत गुप्ता एसआईआर प्रोसेस की देखरेख करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी मान्य व्यक्ति वोटर बनने से छूट न जाए और कोई भी अवैध वोटर इसमें शामिल न हो। इस काम में मदद के लिए चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में 12 और आईएएस अफसरों को भी विशेष पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया है।
जानकारी के मुताबिक स्मिता पांडे पश्चिम बर्धमान, पूर्व बर्धमान और बीरभूम देखेंगी। वहीं, तन्मय चक्रवर्ती को मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों की जिम्मेदारी चुनाव आयोग ने दी है। रणधीर कुमार को उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर, सी. मुरुगन को दक्षिण 24 परगना और कोलकाता दक्षिण और आर. अर्जुन को चुनाव आयोग ने कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों में एसआईआर पर नजर रखने भेजा है। इनक अलावा राजीव कुमार को हावड़ा, नीलम मीणा को पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम, अश्विनी कुमार यादव को उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, निरंजन कुमार को दार्जिलिंग और कलिम्पोंग, देवी प्रसाद करनम को पुरुलिया और बांकुड़ा, रचना भगत को पश्चिम बंगाल के नदिया और विश्वनाथ को हुगली में बतौर विशेष पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।
चुनाव आयोग से बीजेपी ने शिकायत की थी कि राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी एसआईआर के मसले पर बीएलओ और अफसरों पर दबाव डाल रही है। वहीं, टीएमसी के 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों से मिला था। टीएमसी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग पर कई सवाल दागे थे। साथ ही आरोप भी लगाया था। चुनाव आयोग ने टीएमसी सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए सभी आरोपों को गलत बताया था। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बीते दिनों चुनाव आयोग दफ्तर पर हमला भी हुआ था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया था कि वो दफ्तर और स्टाफ को सुरक्षा दें।
पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। बीजेपी लगातार ये आरोप लगाती है कि टीएमसी की सुप्रीमो ममता बनर्जी बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बसाने और उनको अपना वोटर बनाने का काम करती हैं। वहीं, ममता बनर्जी ने हमेशा इस आरोप का खंडन किया है। ममता बनर्जी ने ये भी कहा है कि एसआईआर में अगर पश्चिम बंगाल में एक भी वोटर का नाम कटा, तो वो बड़ा आंदोलन करेंगी। बीते दिनों ही चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान अब तक 10 लाख लोगों का अता-पता नहीं है। वहीं, यूआईडीएआई ने चुनाव आयोग को बताया है कि उसने पश्चिम बंगाल में मृत 36 लाख लोगों के नाम वाले आधार कार्ड रद्द कर दिए हैं।
