May 25, 2026

Hind foucs news

hindi new update

महमूद मदनी के खिलाफ खड़े हुए मुस्लिम बुद्धिजीवी, साझा बयान जारी कर सांप्रदायिक तनाव और नफरत फैलाने वाला बताया

नई दिल्ली। कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े मौलाना महमूद मदनी के खिलाफ आवाज उठाई है। इन मुस्लिम बुद्धिजीवियों में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख मौलाना उमर अहमद इलासी, मौलाना अबुल कलाम आजाद के प्रपौत्र और पूर्व कुलपति फिरोज बख्त अहमद, नामचीन वकील प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद तैयब, कारोबारी इकबाल मोहम्मद मलिक और मोहम्मद अहमद हैं।

इन सभी ने साझा तौर पर चिट्ठी सार्वजनिक कर मौलाना महमूद मदनी के जिहाद और सुप्रीम कोर्ट वगैरा के बारे में दिए बयान की निंदा की है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने संयुक्त बयान में कहा है कि महमूद मदनी का बयान देश की शांतिपूर्ण सामाजिक हालत को खराब करने, नफरत और दंगा फैलाने वाले हैं। इन सभी ने कहा है कि भारत सद्भाव के धर्म, सूफी और भक्ति आंदोलन वाले संतों का देश है। इसे जगतगुरु के तौर पर स्थापित करना चाहिए। बयान में मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा है कि मौलाना अरशद मदनी और महमूद मदनी के विवादित बयान और बदलता राजनीतिक रूप सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाला है।

उन्होंने कहा है कि मदनी परिवार देश के मुस्लिमों का प्रतिनिधि नहीं है। यहां के मुसलमान भारत को दार-उल-अमन यानी शांति का घर मानते हैं। जहां सभी धर्मों का सम्मान हो। मौलाना महमूद मदनी ने बीते दिनों भोपाल में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट समेत अदालतों में मुस्लिमों के खिलाफ फैसले आ रहे हैं। इस वजह से उसे सुप्रीम कोर्ट नहीं कह सकते। उन्होंने कहा था कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद बताकर मुसलमानों को ठेस पहुंचाई जा रही है। सरकार और मीडिया में बैठे जिम्मेदार इन शब्दों का इस्तेमाल बिना शर्म करते हैं। महमूद मदनी ने ये भी कहा था कि मुस्लिमों पर गलत आरोप लगता है। उन्होंने ये भी कहा था कि जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *