February 15, 2026

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क्या है संचार साथी एप?, मोदी सरकार की ओर से मोबाइल फोन पर जरूरी किए जाने पर विपक्ष ये कहकर कर रहा विरोध

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग की ओर से सभी मोबाइल फोन निर्माताओं को आदेश दिया गया है कि वे 90 दिन के भीतर अपने बनाए मोबाइल फोन में संचार साथी एप दें। दूरसंचार विभाग ने आदेश में कहा है कि एप इस तरह दिया जाना चाहिए कि उसे मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाला डिसेबल न कर सके और इसे हटा भी न सके। पहले बने मोबाइल फोन में कंपनियों को ओटीए के जरिए संचार साथी एप डालना होगा। इस पर सियासत गर्माई है। विपक्ष ने इस बारे में खबर आने के साथ ही संचार साथी एप के जरिए लोगों के निजता का हनन करने और नजरदारी करने का आरोप लगाते हुए सरकार पर हमला बोल दिया है।

कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि ये डरावना टूल है। उन्होंने संचार साथी एप जरूरी करने को असंवैधानिक से भी परे बताया है। कांग्रेस महासचिव ने कहा है कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजादी के मौलिक अधिकार का जरूरी हिस्सा है। वहीं, कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने मोदी सरकार को बिग ब्रदर बताते हुए कहा है कि संचार साथी एप जरूरी करना हमारी जिंदगी पर कब्जा कर लेगा। कार्ति चिंदबरम ने इसे पेगासस प्लस प्लस बताया है। पेगासस के जरिए विरोधियों की जासूसी कराने का विपक्ष ने पहले आरोप लगाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की जांच में ये आरोप सही नहीं पाया गया।

अब आपको बताते हैं कि संचार साथी एप दरअसल क्या करता है? मोदी सरकार ने नकली आईएमईआई वाले मोबाइल की पहचान, अपने नाम पर लिए गए किसी मोबाइल नंबर की पहचान, खोए या चोरी किए गए मोबाइल फोन को ब्लॉक करने और इसकी शिकायत करने, फ्रॉड कॉल की शिकायत करने और बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अधिकृत फोन नंबर देखने के लिए संचार साथी एप बनाया है। पहले मोदी सरकार ने इसे पोर्टल के तौर पर पेश किया था। अब विपक्ष आरोप लगा रहा है कि संचार साथी एप के जरिए मोदी सरकार आम लोगों पर नजरदारी करना चाहती है। वहीं, सरकार इस आरोप को गलत बता रही है।

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