फिलीपींस के बाद अब इन दो देशों को भी ब्रह्मोस बेचने की तैयारी में भारत, चीन से इनकी भी है तनातनी
नई दिल्ली। फिलीपींस के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने जा रहे हैं। वियतनाम और इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने के सौदे को अंतिम रूप देने की बातचीत चल रही है। द टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के मुताबिक वियतनाम और इंडोनेशिया को ब्रह्मोस बेचने का करार 4000 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का होगा। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि फिलीपींस भी भारत से और ब्रह्मोस मिसाइल खरीद सकता है। फिलीपींस ने इससे पहले भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की तीन बैटरी खरीदी थीं।
फिलीपींस के अलावा वियतनाम और इंडोनेशिया उन देशों में हैं, जिनकी समुद्री सीमा विवाद के कारण चीन से तनातनी है। ऐसे में भारत की ओर से इन देशों को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का सौदा बहुत अहम है। सूत्रों ने अखबार को बताया कि वियतनाम और इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने पर रूस ने भी हरी झंडी दे दी है। ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ मिलकर बनाया जाता है। ऐसे में तीसरे किसी देश को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने के लिए रूस की हामी जरूरी होती है। ब्रह्मोस मिसाइल ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में जबरदस्त भूमिका अदा की थी। ब्रह्मोस मिसाइल से भारत ने पाकिस्तान के तमाम सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त तबाही मचाई थी।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसमें रैमजेट इंजन लगा होता है। हवा से ऑक्सीजन लेकर ये मिसाइल उड़ान भरती है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल आवाज से 2.8 गुना ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ान भरकर दुश्मन को चौंकाती है। ब्रह्मोस मिसाइल तय की गई दिशा में काफी नीचे भी उड़ान भरने में सक्षम है। इस वजह से दुश्मन के रडार की नजरों से भी ये आसानी से बच जाती है। अपने लक्ष्य को ब्रह्मोस इतनी सटीकता से भेदती है, जितनी अब तक किसी और मिसाइल में नहीं देखी गई है। लक्ष्य के 10 मीटर के दायरे में ब्रह्मोस 300 किलो के पारंपरिक बम को गिराकर बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाती है। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने अब तक 60000 करोड़ से ज्यादा के ब्रह्मोस मिसाइल खरीदे हैं। ब्रह्मोस मिसाइल जमीन, हवा और समुद्र से भी दागी जा सकती है।
