April 16, 2026

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अमेरिका में काम करने के इच्छुक भारतीयों को ट्रंप प्रशासन का झटका, एच1बी वीजा के लिए लॉटरी सिस्टम खत्म

वॉशिंगटन। अमेरिका में काम करने वाले और वहां जाकर रोजगार के इच्छुक भारत के डॉक्टरों, टीचरों और टेक्नोक्रेट्स के लिए अमेरिका से मुश्किल खड़ी करने वाली खबर है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच1बी वीजा के लिए लॉटरी सिस्टम खत्म कर दिया है। अब कामगार की स्किल और उसे मिलने वाली तनख्वाह के आधार पर एच1बी वीजा दिए जाएंगे। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी (डीएचएस) ने कहा है कि एच1बी वीजा के लिए लॉटरी प्रक्रिया खत्म करने से उच्च कार्यकुशल और ज्यादा तनख्वाह पाने वाले विदेशियों को मौका मिलेगा। भारतीयों के लिए ये झटका है। क्योंकि हर साल ज्यादातर भारतीयों को ही एच1बी वीजा मिलता रहा है।

एच1बी वीजा देने के नए नियमों के बारे में अमेरिका के सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) के प्रवक्ता मैथ्यू ट्रागेसर ने कहा कि लॉटरी के पुराने सिस्टम से गड़बड़ी की जाती थी। ट्रागेसर ने दावा किया कि लॉटरी सिस्टम के कारण कुछ नौकरी देने वाले अमेरिका के लोगों को रखने की जगह कम तनख्वाह पर विदेशियों को लाते थे। उन्होंने कहा कि नया तरीका एच1बी वीजा के बारे में अमेरिकी संसद की नीति को दिखाता है। इससे उच्च कार्यकुशल और ज्यादा तनख्वाह वालों को लेने का कंपनियों पर दबाव बनेगा। वहीं, डीएचएस ने कहा कि एच1बी वीजा देने के लॉटरी वाले सिस्टम की कई साल से आलोचना हो रही थी।

डीएचएस ने कहा कि लॉटरी से एच1बी वीजा देने से कम तनख्वाह वाले कामगारों की संख्या ज्यादा हो गई थी। इससे अमेरिकियों को नौकरी मिलने के आसार कम थे और कम तनख्वाह भी मिल रही थी। नए नियम के तहत एच1बी वीजा के आवेदन पर देखा जाएगा कि वो कितना कार्यकुशल है। साथ ही उसे कंपनी कितनी तनख्वाह पर रखने वाली है। डीएचएस ने ये साफ किया है कि अलग-अलग स्तर पर नियोक्ता कर्मचारियों के लिए एच1बी वीजा का आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, उच्च कार्यकुशलता और ज्यादा तनख्वाह वालों को प्राथमिकता मिलेगी। एच1बी वीजा के नए नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होंगे। अब तक अमेरिका हर साल 65000 एच1बी वीजा देता रहा है। साथ ही अमेरिका के शिक्षण संस्थानों से उच्च शिक्षा लेने वालों के लिए अतिरिक्त 20000 एच1बी वीजा का भी प्रावधान रहा है।

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