पश्चिम बंगाल में सीईसी ज्ञानेश कुमार और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ पुलिस से शिकायत
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दो बुजुर्गों के परिजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। इन दोनों बुजुर्गों का नाम एसआईआर के बाद आई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं था। दोनों को पश्चिम बंगाल निर्वाचन आयोग ने नोटिस भेजा था। जिसके बाद इन दोनों की मौत हो गई। दोनों बुजुर्गों के घरवालों ने पुलिस से शिकायत की है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार और मनोज अग्रवाल के कारण जान गई है। इससे पश्चिम बंगाल में सियासत और गर्मा सकती है। मंगलवार को भी पूर्व मेदिनीपुर जिले में बिमल शी नाम के बुजुर्ग का फांसी पर लटका शव मिला था। बिमल को भी चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा था।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद बीते दिनों चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी। जिन लोगों का नाम इस वोटर लिस्ट में नहीं है, उनको नोटिस जारी कर चुनाव आयोग सुनवाई कर रहा है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में दुर्जन मांझी को भी नोटिस मिला था। दुर्जन के बेटे कनाई मांझी का कहना है कि उनके पिता का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में था, लेकिन चुनाव आयोग ने जो लिस्ट अपलोड की, उसमें नाम नहीं था। इस वजह से दुर्जन मांझी को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा था। कनाई का आरोप है कि नोटिस मिलने के बाद उनके पिता घबरा गए और चलती ट्रेन के सामने कूद गए। जिससे उनकी जान चली गई।
वहीं, कोलकाता के पास हावड़ा में जमात अली शेख की भी नोटिस मिलने के बाद मौत हुई। जमात के बेटे का आरोप है कि उनके पिता वोटर थे, लेकिन फिर भी नोटिस भेजा गया था। जमात अली शेख के बेटे के मुताबिक चुनाव आयोग से नोटिस मिलने के बाद उनके पिता तनाव में थे और उनकी मौत हो गई। कनाई मांझी और जमात अली शेख के परिजनों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दी है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि तकनीकी खामी के कारण 1.3 लाख वोटर के नाम ऑनलाइन नहीं दिख रहे हैं। उनको सुनवाई में नहीं आना है। वहीं, चुनाव आयोग के एक अफसर ने मीडिया से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर केस नहीं हो सकता। अगर पुलिस केस दर्ज करती है, तो उसके कानूनी नतीजे होंगे।
