February 15, 2026

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लोनी में 2027 की सियासी बिसात बिछने लगी: अभी दूर है चुनाव, पर दावेदारों की चालें तेज

रविन्द्र बंसल –

लोनी (गाजियाबाद)। भले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी लंबा समय शेष हो, लेकिन लोनी विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल अभी से तेज हो चुकी है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशी भी अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। बैठकों, जनसंपर्क, सामाजिक आयोजनों और संगठनात्मक गतिविधियों से साफ संकेत मिल रहा है कि लोनी की राजनीति अब शांति के दौर से बाहर निकलकर चुनावी बेचैनी के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

वर्तमान परिदृश्य में लोनी विधानसभा से चार प्रमुख चेहरे ऐसे हैं, जिनका चुनावी रण में उतरना लगभग तय माना जा रहा है। इनमें रालोद नेता और खतौली विधायक मदन भैया, मौजूदा भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर, लोनी ब्लॉक प्रमुख रहे अनिल कसाना और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज धामा शामिल हैं। हालांकि भविष्य में और भी नाम सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल सियासी चर्चा इन्हीं चारों के इर्द-गिर्द घूम रही है।

मदन भैया: अनुभव और कद का दांव
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता मदन भैया का नाम लोनी की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा में है। पांच बार विधायक रह चुके मदन भैया वर्तमान में रालोद से खतौली विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे पहले वह चार बार खेकड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं, जिसमें लोनी क्षेत्र भी शामिल था। लोनी विधानसभा क्षेत्र के जावली गांव से उनका सीधा जुड़ाव है, जो उनकी स्थानीय पकड़ को मजबूत करता है।
सूत्रों के मुताबिक मदन भैया इस बार लोनी से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। भाजपा-रालोद गठबंधन को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं और माना जा रहा है कि यदि गठबंधन यथावत रहा तो यह सीट रालोद के खाते में जा सकती है। ऐसे में मदन भैया का अनुभव, राजनीतिक कद और क्षेत्रीय पहचान उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।

नंदकिशोर गुर्जर: हैट्रिक की तैयारी
लोनी के मौजूदा भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और अब तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी आक्रामक शैली, बेबाक बयानबाजी और स्पष्ट राजनीतिक रुख उन्हें समर्थकों के बीच लोकप्रिय बनाता है।
नंदकिशोर गुर्जर के समर्थकों का दावा है कि उनकी सक्रियता और क्षेत्र में निरंतर मौजूदगी उन्हें फिर से मजबूत स्थिति में खड़ा करती है। हालांकि गठबंधन की राजनीति और टिकट वितरण की तस्वीर साफ होने के बाद ही उनकी राह कितनी आसान होगी, यह तय हो पाएगा।

अनिल प्रमुख: देहात की ताकत
लोनी ब्लॉक के प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य रह चुके अनिल कसाना भी इस बार चुनावी मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में किए गए कार्यों के चलते उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। देहात क्षेत्र में उनका प्रभाव उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।
सूत्र बताते हैं कि अनिल प्रमुख भाजपा से टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन यदि उन्हें टिकट नहीं मिला तो भी वह किसी न किसी रूप में चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में लोनी की राजनीति में त्रिकोणीय नहीं बल्कि बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

मनोज धामा: शहरी वोट बैंक पर नजर
मनोज धामा भी लोनी की सियासत में एक अहम चेहरा हैं। उनकी पत्नी रंजीता धामा लगातार दूसरी बार लोनी नगर पालिका की अध्यक्ष हैं, जबकि इससे पहले मनोज धामा स्वयं भी नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। शहरी क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
रालोद से जुड़े मनोज धामा को लेकर सूत्रों का कहना है कि गठबंधन हो या न हो, वह हर हाल में चुनाव मैदान में उतरेंगे। शहरी मतदाताओं पर उनकी पकड़ उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान देती है।

समीकरण तय करेंगे नतीजा
कुल मिलाकर लोनी विधानसभा में सियासत की बिसात पूरी तरह सजने लगी है। जातीय-सामाजिक समीकरण, शहरी बनाम ग्रामीण वोट बैंक, भाजपा-रालोद गठबंधन की दिशा और टिकट वितरण—ये सभी कारक आने वाले समय में तस्वीर को पूरी तरह बदल सकते हैं।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऊंट किस करवट बैठेगा, लेकिन इतना तय है कि 2027 के चुनाव से पहले लोनी की राजनीति में मुकाबला रोचक, तीखा और बहुआयामी होने वाला है। चुनाव अभी दूर है, मगर राजनीतिक जंग की शुरुआत हो चुकी है।

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