February 16, 2026

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज के माघ मेला प्रशासन ने भेजा नोटिस, पूछा- आप खुद को शंकराचार्य कैसे बता रहे?

प्रयागराज। यूपी के प्रयागराज में इन दिनों माघ मेला चल रहा है। जिसमें शामिल होने लाखों की संख्या में श्रद्धालु आए हैं। प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन स्नान के मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच ठन गई थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी और संतों की भीड़ लेकर संगम स्नान करने जा रहे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वानंद का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस ने उनसे और संतों से धक्का-मुक्की और मारपीट की। जिसके विरोध में वो धरने पर बैठे हैं। वहीं, अब माघ मेला प्रशासन ने कोर्ट केस को आधार बनाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा है।

माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा है कि वो बताएं कि किस तरह खुद को शंकराचार्य कहते हैं। माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद होने या न होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस का हवाला भी दिया है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक वो आदेश न जारी करे, कोई भी खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नहीं घोषित कर सकता। माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे नोटिस में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बावजूद आपने खुद के शिविर में शंकराचार्य लिखा है। जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।

प्रयागराज के माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे नोटिस में कहा है कि इसका 24 घंटे में जवाब दें कि आप खुद के नाम के साथ किस तरह शंकराचार्य शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं और अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के तौर पर प्रचारित और प्रसारित कर रहे हैं। माघ मेला प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए नोटिस से साफ है कि इस मामले में अब टकराव और बढ़ सकता है। बता दें कि कुंभ मेले के दौरान तो शंकराचार्य और मठों के प्रमुख शाही स्नान के लिए पालकी और रथ में संतों के साथ जाते हैं, लेकिन माघ मेला में शाही स्नान करने का कोई नियम नहीं है। प्रयागराज और माघ मेला प्रशासन का कहना है कि भीड़ के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोकी गई थी। जिसमें पहिए भी लगे थे। जिससे कोई हादसा न हो। जिसके बाद विवाद खड़ा हुआ।

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