आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी को लगाई फटकार
नई दिल्ली। आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनिमल एक्टिविस्ट मेनका गांधी को फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मेनका गांधी की टिप्पणियों को अदालत की अवमानना बताया है। बार एंड बेंच की खबर के अनुसार बेंच ने मेनका गांधी के वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि आपने बताया कि कोर्ट को सतर्क रहने की जरूरत है लेकिन क्या आपने अपने क्लाइंट की टिप्पणियां सुनी हैं जो उन्होंने कोर्ट को लेकर दी। मेनका गांधी के एक पॉडकास्ट का जिक्र करते हुए बेंच ने कहा कि उन्होंने कोर्ट के प्रति किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया और उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी थी।
अदालत ने राजू रामचंद्रन से कहा कि यह हमारी उदारता है कि हम आपके क्लाइंट पर अवमानना की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने राजू रामचंद्रन से यह भी पूछा है कि जब मेनका गांधी केंद्रीय मंत्री थीं, तब उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए क्या किया और कितना बजट उपलब्ध कराया था। इस पर रामचंद्रन ने जवाब दिया कि यह बजट आवंटन नीति का विषय है, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवादी अजमल कसाब की ओर से भी वो पैरवी कर चुके हैं। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने तल्ख शब्दों में कहा कि अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की थी मगर आपकी क्लाइंट ने की है।
सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि बीते पांच वर्षों से आवारा पशुओं को लेकर बने नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। साथ ही अदालत ने इस ममाले में नगर निकायों और राज्यों की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं एक अन्य वकील ने दलील में कहा कि अगर कुत्तों का पेट भरा होता है तो वो हिंसक नहीं होते।
