भारत ने दुनिया को पहली बार दिखाई अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल
दुश्मन के पोतों को करेगी ध्वस्त, जानिए इसकी खासियत
नई दिल्ली। देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हर साल की तरह दिल्ली के कर्तव्य पथ पर परेड में सेना के शौर्य और अत्याधुनिक हथियारों को प्रदर्शित किया गया। इस बार गणतंत्र दिवस पर भारत ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल का भी प्रदर्शन किया। ये एंटी शिप लॉन्ग रेंज मिसाइल है, जो आवाज की रफ्तार से 10 गुना तेजी से उड़ान भर सकती है। इस रफ्तार के कारण भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल को दुश्मन का कोई रडार पकड़ नहीं सकेगा और पलक झपकाने से पहले ही समुद्र में उसका पोत निशाना बनकर नष्ट हो जाएगा।
भारत ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल का नाम LR-AShM दिया है। तकनीकी के मामले में भारत की ये मिसाइल चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ गेम चेंजर का काम करेगी। भारतीय नौसेना के पोत से दागे जाने के बाद ये 12500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरती है। भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल से 1500 किलोमीटर दूर दुश्मन के पोत को निशाना बनाया जा सकता है। भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल दो चरणों की है। इसमें दो स्टेज हैं। इन स्टेज में ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। खास तौर से दुश्मन देशों के विमानवाहक पोतों को नष्ट करने के लिए इसे डिजाइन किया गया है। फिलहाल एशिया में भारत के अलावा चीन के पास ही विमानवाहक पोत हैं। हाइपरसोनिक मिसाइल के अलावा भारत ने ब्रह्मोस, आकाश और सूर्यास्त्र मिसाइल भी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल की।
दागे जाने के बाद भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल आवाज से 10 गुना की रफ्तार पकड़ती है। इसके बाद गति धीमी होने के बावजूद ये आवाज से 5 गुना गति से दुश्मन की ओर बढ़ती है। ये मिसाइल अत्यधिक मैन्यूवरेवल है। यानी ये अपनी दिशा बदल सकती है। साथ ही काफी नीचे उड़ान भरने में भी सक्षम है। भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल 2000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकती है। पहली बार इसे भारत ने दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। जानकारी के मुताबिक डीआरडीओ इस हाइपरसोनिक मिसाइल की रेंज बढ़ाकर 3500 किलोमीटर करने और जमीन से दागे जाने लायक भी बनाने की तैयारी में है। इस मिसाइल में रडार सीकर और देश में बने एवियोनिक्स उपकरण लगे हैं। जिनकी मदद से ये 100 फीसदी सटीक वार करती है। भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल परंपरागत के साथ परमाणु हथियार भी ले जाने में सक्षम है।
