‘यूजीसी नियमों का दुरुपयोग नहीं होने देंगे…भ्रम फैलाया जा रहा’, हो रहे विरोध पर सरकारी सूत्रों ने कहा
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों का देशभर में विरोध जताया जा रहा है। सवर्ण वर्ग के छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। इस मामले में सरकार की तरफ से जल्दी ही स्थिति साफ होने के आसार हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से मीडिया ने बताया है कि सरकार किसी भी सूरत में यूजीसी नियमों का दुरुपयोग नहीं होने देगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यूजीसी नियमों के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है।
यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने का नियम लागू किया है। पहले सोशल मीडिया पर यूजीसी नियमों का विरोध हुआ। फिर सड़कों पर भी आंदोलन आ गया। वहीं, इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई है। मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ये भी बताया है कि यूजीसी नियमों पर भ्रम फैलने से रोकने के लिए सरकार सभी तथ्य सामने रखने की तैयारी कर रही है। ताकि संसद के बजट सत्र से पहले ही यूजीसी नियमों का विरोध करने वालों के सामने स्थिति साफ हो जाए। यूजीसी ने ये कहकर नया नियम बनाया है कि बीते पांच साल में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों में 118 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में ऐसी शिकायतों को सुनने और निपटारे के लिए इक्विटी कमेटी बनाने के लिए यूजीसी ने कहा है।
यूजीसी नियमों के खिलाफ सवर्ण छात्रों ने आवाज उठाई है। उन्होंने इसे सवर्णों के खिलाफ बताया है। यूजीसी नियम का इसलिए विरोध हो रहा है, क्योंकि इसमें सवर्ण छात्रों को भेदभाव का शिकार नहीं माना गया है। सवर्ण छात्रों और संगठनों ने आशंका जताई है कि इस वजह से सवर्ण छात्र को आरक्षित श्रेणी का छात्र फंसा सकता है। सवर्ण छात्रों का आरोप है कि यूजीसी के नियम एकतरफा हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में भी कहा गया है कि नए नियम यूजीसी एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के उलट हैं। यूजीसी एक्ट का विरोध करने वालों की ये भी दलील है कि इससे भेदभाव और बढ़ सकता है।
