आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह में सभी पक्षों से मांगी लिखित दलीलें
नई दिल्ली। आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज पूरी हो गई और अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने डॉग लवर्स, कुत्ते के काटने के पीड़ितों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों समेत सभी पक्षों को एक सप्ताह के अंदर लिखित दलीलें प्रस्तुत करने को कहा है। कुत्तों के काटने, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।
इस केस के एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कुछ राज्यों ने शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुरूप कदम उठाए हैं, मगर पूरी तरह पालन करने के लिए अभी बहुत काम बाकी है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी की दर बढ़ाने के निर्देशों का पालन न करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वो सब हवाई किले बना रहे हैं। वहीं बार एंड बेंच के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को एक ऐसा ऐप डेवलप कराने के लिए कहा है जिस पर लोग हाईवे पर आवारा जानवरों से जुड़ी जानकारी दे सकें। एनएचएआई के वकील ने ऐसा करने का कोर्ट का आश्वासन दिया है।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने 13 जनवरी को कहा था कि अगर बच्चे या वरिष्ठ नागरिक कुत्तों के काटने से घायल होते हैं या उनकी मौत होती है, तो राज्य सरकार को इस मामले में मुआवजा देना होगा। साथ ही कुत्तों को खाना खिलाने वाले डॉग लवर्स की जवाबदेही तय करने की बात भी सुप्रीम कोर्ट ने कही थी। बेंच ने कहा था कि कोई नहीं जानता कि कोई कुत्ता कब काटेगा और कब नहीं इसलिए इलाज से बेहतर बचाव है।
