April 22, 2026

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मेधा पाटकर की ओर से दायर मानहानि मामले में दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना सभी आरोपों से बरी

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के द्वारा दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में आज दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। अदालत ने एलजी वीके सक्सेना को बड़ी राहत देते हुए उन पर लगाए सभी आरोपों से उन्हें बरी कर दिया है। मेधा पाटकर ने वीके सक्सेना के खिलाफ साल 2000 में यह मानहानि का केस दर्ज कराया था। सक्सेना उस समय अहमदाबाद स्थित एक गैर सरकारी संगठन ‘काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के प्रमुख थे। पाटकर ने आरोप लगाया था कि सक्सेना ने उनके और नर्मदा बचाओ आंदोलन के खिलाफ विज्ञापन प्रकाशित कराए जिससे उनकी छवि को नुकसान हुआ।

साकेत कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान पिछले साल मेधा पाटकर ने नए गवाह को पेश करने की अनुमति मांगी थी। जज राघव शर्मा ने मेधा पाटकर के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था। जज ने एक नए गवाह के अचानक पेश होने की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए तल्ख लहजे में टिप्पणी की थी कि यह मुकदमे में देरी करने का जानबूझकर किया गया एक प्रयास है। कोर्ट ने कहा था कि केस से जुड़े सभी सूचीबद्ध गवाहों की जांच की जा चुकी है।

जज शर्मा ने कहा था कि यह मामला पिछले दो दशकों से लंबित है और अब उसे और अधिक लंबा नहीं खीजा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि केस के इतने साल चलते के बाद अगर पक्षकारों को इतनी देर से मनमाने ढंग से नए गवाह पेश करने की अनुमति दी जाए तो मुकदमों का कभी निस्तारण ही नहीं होगा, क्योंकि वादी जब अपनी मनजर्मी के अनुसार जब चाहें नए गवाह को कोर्ट में पेश कर सकते हैं। इससे मुकदमे की कार्यवाही लंबी खिंचती रहेगी और कोई हल नहीं निकल पाएगा।

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