‘अमेरिका ने टॉयलेट पेपर की तरह पाकिस्तान का इस्तेमाल कर फेंक दिया’, अपने देश की संसद में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का निकला दर्द
इस्लामाबाद। ऑपरेशन सिंदूर में भारत से पिटने के बाद जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अमेरिका बुलाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लंच दिया और फिर शहबाज शरीफ और मुनीर से मुलाकात कर बलोचिस्तान इलाके से कच्चा तेल और मिनरल्स निकालने में पैसा लगाने की बात कही, तो पाकिस्तान के हुक्मरान और लोग खुशी से उछलने लगे थे। पाकिस्तान के नेता उस वक्त चीन की जगह अमेरिका और ट्रंप का गुणगान कर रहे थे, लेकिन अब अमेरिका का नाम लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जो कहा, उससे साफ है कि उनके देश का अमेरिका से मोहभंग हो गया है।
शहबाज सरकार में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश की संसद में कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल किया है। ख्वाजा आसिफ यहीं नहीं थमे। उन्होंने ये तक कहा कि पाकिस्तान ने सुपर पावर अमेरिका को खुश करने के लिए अपनी नीतियां बदलीं, अपना इतिहास बदला, लेकिन उसने पाकिस्तान का इस्तेमाल टॉयलेट पेपर की तरह किया। यानी पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और उसे फेंक दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक और परवेज मुशर्रफ का नाम भी लिया और कहा कि इनकी नीतियों की वजह से पाकिस्तान का ये हाल हुआ। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान पर रूस ने कब्जा नहीं किया था। उसे अफगानिस्तान की तत्कालीन सरकार ने बुलाया था। हम बेकार उस जंग में फंस गए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के तालिबान के साथ अपने देश के संबंध खराब होने में भी पहले के हुक्मरानों की गलत नीतियों का हवाला दिया। ख्वाजा आसिफ के इस बयान से साफ हो रहा है कि शायद पाकिस्तान ने अमेरिका से कोई बड़ी उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन ट्रंप ने वो पूरी नहीं की। इसके साथ ही ये संकेत भी मिल रहा है कि पाकिस्तान के हुक्मरान और सेना अब एक बार फिर पुराने दोस्त चीन का रुख कर सकते हैं। चीन पहले भी पाकिस्तान की मदद करता रहा है। उसने पाकिस्तान को अरबों डॉलर कर्ज भी दे रखा है। बदले में पाकिस्तान ने चीन को ग्वादर बंदरगाह तक सड़क बनाने की उसकी योजना में मदद दी, लेकिन बलूचिस्तान में जिस तरह हिंसा हो रही है और चीन के कई इंजीनियर मारे गए हैं, उसकी वजह से ये नहीं कहा जा सकता कि पुराना दोस्त फिर पाकिस्तान के साथ कितनी मजबूती से खड़ा होगा।
