कांशीराम को लेकर सपा के कौन से ऐलान पर भड़क गईं मायावती? अखिलेश यादव पर साधा निशाना
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी और ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों के अपमान का आरोप लगाया है। दरअसल सपा ने ऐलान किया है कि कांशीराम जी की जयंती पर पीडीए दिवस मनायेगी इस पर मायावती ने पलटवार करते हुए कहा कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाजी है। सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों के स्वार्थ के लिए केवल छलावा और दिखावा है। मायावती ने अपने वोटरों से अपील करते हुए कहा कि सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये।
मायावती ने कहा कि 1993 में सपा और बीएसपी की गठबंधन सरकार बनी और बीएसपी की दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला तो बीएसपी को दिनांक 1 जून सन् 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है। इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले खासकर कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया जिला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था।
बीएसपी सुप्रीमो ने आगे कहा कि जब बीएसपी की सरकार ने कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुए कांशीराम नगर नाम से नया जिला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य जिलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है? बीएसपी की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया जिला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दिया था। सहारनपुर में कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान?
