दुनिया को सद्भाव की जरूरत है, संघर्ष की नहीं, वैश्विक हालात का जिक्र कर बोले मोहन भागवत
नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मौजूदा वैश्विक हालात और युद्ध को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही है। नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत बोले, विश्व अभी लड़खड़ा रहा है। जो भी स्थिति है वो हमारे सामने है। युद्ध होते हैं, युद्ध क्यों हो रहे हैं, यह स्वार्थ है और कुछ नहीं है। वर्चस्व की वजह से युद्ध हो रहे हैं, स्वार्थ के लिए यह चाहिए, वह चाहिए, कोई वस्तु मेरे यहां नहीं है इसलिए वहां से लाऊंगा, वहां पर वर्चस्व चाहिए। युद्ध स्वार्थ के लिए हो रहे हैं। दुनिया को संघर्ष की नहीं, सद्भाव की जरूरत है। दुनिया विनाश के कगार पर जा रही है और युद्ध के बीच बार-बार देशों से यह आवाज उठ रही है कि भारत इसको समाप्त कर सकता है।
भागवत ने समाज में सभी के एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, पहले एक प्रचंड धार्मिक जागृति शुरू हुई उसके बाद बाकी सारी बातें हुईं। फिर स्वतंत्रता का संग्राम हुआ। फिर, नए भारत ने उसी धार्मिक दृष्टिकोण के आधार पर अपना संविधान बनाया। संविधान में जो भी सारे चित्र हैं वो हमारी इसी परम्परा को दर्शाते हैं। समाज जागृत हो जाए, सब आपस के भेद भूलकर एकजुट हों इस उद्देश्य से विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई थी। समाज को एकजुट करने का यह काम एक संस्था या संगठन का नहीं है। न यह केवल भारत और हिंदू समाज का काम है। लेकिन करना हमें (भारत को) ही है और दूसरा कोई करेगा नहीं।
संघ प्रमुख ने कहा, जब हम करने लगेंगे तो हमारी शक्ति के कारण हमारी आवाज सुनी जाएगी और जब बात सुनी जाएगी तो समझ में आएगी। उसके बाद हमारा उदाहरण देकर पूरी दुनिया उसका अनुकरण करेगी। आएसएस प्रमुख ने कहा कि पिछले 2000 सालों से दुनिया के संघर्षों को सुलझाने और उनका हल निकालने के लिए कई प्रयोग किए गए मगर बहुत कम सफलता मिल पाई।
