सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी सरकार को फटकार, याचिका खारिज कर कहा- विकास के मामले को राजनीतिक मत बनाइए
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई। मामला कोलकाता मेट्रो के ऑरेंज लाइन का है। ममता सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ये विकास का मामला है। इसे राजनीतिक मत बनाइए। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि ये सिर्फ अफसरों के अड़ियल रुख को दिखाता है। जिसके तहत ये अफसर कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में देरी करना और उसे रोकना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा था कि वो इस काम को शुरू कराए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में कोई कमी नहीं थी। उम्मीद है कि प्रोजेक्ट वक्त पर पूरा होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बेंच में ममता बनर्जी सरकार ने मई तक का वक्त मांगा और कहा कि चुनाव के कारण देरी हो रही है। इस पर बेंच के सदस्य जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि हाईकोर्ट से आपने कहा था कि त्योहार हैं और इंतजाम करने हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल दागा कि क्या आपके लिए विकास से ज्यादा जरूरी त्योहार है? जस्टिस बागची ने कहा कि आप अपनी मर्जी से कर रहे हैं। जबकि, कर्तव्य से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तौर पर चुनी गई सरकार से ये उम्मीद नहीं कि वो ये कहे कि फिलहाल इस काम को नजरअंदाज कर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को वोटिंग कराने में अगर दिक्कत नहीं, तो मेट्रो प्रोजेक्ट तो आचार संहिता लागू होने से पहले का है। कोर्ट ने साफ कहा कि हम पश्चिम बंगाल सरकार को चुनाव का बहाना बनाकर विकास का काम रोकने की मंजूरी नहीं देंगे। सीजेआई सूर्यकांत ने ममता सरकार के वकील से कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने बहुत नरमी बरती है। ये ऐसा मामला है, जिसमें आपके चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। ये कर्तव्य में लापरवाही है। ऐसे मुद्दे को सियासी बनाया जा रहा, जो असल में कोई मुद्दा है ही नहीं। बता दें कि कोलकाता मेट्रो के ऑरेंज लाइन स्थित चिंगड़ीघाटा इलाके में काम के लिए 300 मीटर तक कुछ वक्त का ट्रैफिक बंद किया जाना है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार पर इसमें सहयोग न देने का आरोप है।
