इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जानलेवा चाइनीज मांजा मामले में यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी, याचिका में रोक के बावजूद बिकने का लगाया गया है आरोप
प्रयागराज। यूपी सरकार ने लोगों की जान लेने और गंभीर रूप से घायल करने वाले चाइनीज मांझे पर कड़ी रोक के आदेश जारी किए हुए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी चाइनीज मांझा बेचने वालों पर शिकंजा कसने का आदेश दे रखा है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा गया है कि यूपी में चोरी-छिपे खतरनाक चाइनीज मांझा बेचा जा रहा है। याचिका में चाइनीज मांझे से हुए हादसों की जानकारी भी दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार से कहा है कि वो एक महीने में चाइनीज मांझे के बारे में रिपोर्ट दाखिल करे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच में यूपी के देवरिया निवासी वकील प्रदीप पांडे ने अवमानना याचिका दाखिल की है। इस याचिका में प्रदीप पांडे ने यूपी के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को पक्षकार बनाया है। याचिका में प्रदीप पांडे ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2015 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई थी। इसके बाद जनवरी 2026 में भी एक याचिका की सुनवाई कर हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझा बेचने से रोकने के लिए कहा था। याचिका में कहा गया है कि बावजूद इसके यूपी में चाइनीज मांझा बिक रहा है।
याचिका में बताया गया है कि 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में चाइनीज मांझा गले में फंसने से वकील अनूप श्रीवास्तव घायल हुए थे। लखनऊ, उन्नाव, जौनपुर और मेरठ समेत कई जिलों में बीते एक साल में चाइनीज मांझे से कई लोगों की मौत और घायल होने की बात भी याचिका में कही गई है। याचिका में दलील दी गई है कि दुकानों के अलावा ऑनलाइन भी चाइनीज मांझा बिकता है। इसकी बिक्री को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से एक महीने में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
