Crude Oil Price: 1990 के खाड़ी युद्ध के वक्त से भी ज्यादा हुई कच्चे तेल की कीमत, 116 डॉलर प्रति बैरल पर
नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण तमाम देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अब मुश्किल और बढ़ने के आसार हैं। कच्चा तेल महंगा हो गया है। कच्चे तेल की कीमत सोमवार को और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत प्रति बैरल 116.4 डॉलर पर पहुंची। इसमें 3.84 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ। इससे पहले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 फीसदी इजाफा हुआ था। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड का बैरल 3.44 डॉलर बढ़कर 103.1 डॉलर हो गया। पिछले हफ्ते से डब्ल्यूटीआई क्रूड में 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ईरान युद्ध के कारण मार्च में ब्रेंट क्रूड की कीमत 59 फीसदी बढ़ चुकी है। जो 1990 के खाड़ी युद्ध के वक्त कीमत से भी ज्यादा है।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है। ईरान के हमलों के डर से होर्मुज होकर जहाजों का आवागमन बंद हो गया है। साथ ही अपने प्लांट्स पर ईरान के हमलों के कारण कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, यूएई ने कच्चे तेल के उत्पादन पर भी रोक लगा दी है। फिलहाल रूस, अमेरिका और अफ्रीका के देशों से कच्चा तेल देशों को मिल रहा है। आने वाले दिनों में अगर कच्चे तेल की कीमत में कमी नहीं आई, तो तमाम देशों की हालत पतली हो सकती है। इसका असर भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत में अभी पेट्रोल और डीजल की कीमत में तेल कंपनियों ने बढ़ोतरी नहीं की है।
भारत में हाई ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, एटीएफ की कीमत भी बढ़ाई गई थी। सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए बीते दिनों स्पेशल एक्साइज ड्यूटी को घटाया था। पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य किया गया था। वहीं, नेपाल, भूटान, श्रीलंका के अलावा अन्य देशों को निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया था। भारत सरकार कच्चे तेल के संकट से निपटने के लिए रूस और अमेरिका समेत तमाम देशों से कच्चा तेल खरीद रही है। ईरान से उच्च स्तर पर बातचीत कर होर्मुज में फंसे जहाजों में से चार भारत लाए भी जा चुके हैं।
