टाटा संस के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट
नई दिल्ली। एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया है। टाटा ग्रुप की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) जो 18 अगस्त को होने वाली है उससे पहले चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने के फैसले के बारे जानकारी दी। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चंद्रशेखरन तुरंत पद से नहीं हटेंगे वो फरवरी 2027 तक का अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे। उसके बाद वो चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति के लिए अप्लाई नहीं करेंगे। उधर, चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा समूह के सभी शेयरों में भारी गिरावट आई और लगभग 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
एन चंद्रशेखरन साल 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े थे। साल 2009 में उनको टीसीएस का सीईओ और एमडी नियुक्त किया गया। 2016 में चंद्रशेखरन टाटा सन्स के बोर्ड में डायरेक्टर नियुक्त हुए। इसके बाद 2017 उनको टाटा सन्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति के बाद उन्होंने टीसीएस सीईओ और एमडी का पद छोड़ दिया था। चंद्रशेखरन को रतन टाटा का काफी करीबी माना जाता था। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में ही टाटा ग्रुप में एयर इंडिया की वापसी और एविएशन कारोबार के विस्तार समेत कई प्रमुख फैसले लिए गए। इससे पहले नोएल टाटा के साथ चंद्रशेखरन के मतभेद की खबरें भी आई थीं। अपने इस्तीफे पर चंद्रशेखरन ने कहा, मैंने अपने पेशेवर जीवन के 40 साल टाटा समूह में पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर मिलने का उन्होंने आभार जताया।
चंद्रशेखरन ने पत्र में लिखा, टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे कार्यकाल को और पांच साल बढ़ाने की सिफारिश की थी, इस प्रस्ताव को टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और बोर्ड ने भी रिकॉर्ड किया था और इसकी सिफारिश की थी। इसके बाद यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के समक्ष रखा गया। जहां बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया और इस वजह से सर्वसम्मति नहीं बन पाई। उस बैठक के छह महीने बीतने के बाद भी अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। इसलिए कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश के इस फैसले को टालने का निर्णय लिया।
