रूस से भारत ने कच्चे तेल की बड़ी खेप खरीदी, जानिए कितने बैरल आने वाला है?
नई दिल्ली। ईरान युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के आवागमन में बाधा आई। इसके कारण तमाम देशों समेत भारत में भी कच्चे तेल और एलपीजी का संकट पैदा होता दिखा, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने भारत को संकट से बचाने के लिए चौतरफा खरीदारी शुरू कर दी। यहां तक कि एक बार फिर रूस से भारत ने कच्चे तेल की बड़ी खेप खरीदी है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूस से 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च में भी भारत ने रूस से इतनी ही मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है। जबकि, फरवरी में इसकी आधी मात्रा खरीदी थी। हालांकि, रूस से भारत कच्चे तेल की जो खेप खरीद रहा है, उसके लिए प्रति बैरल 5 से 15 डॉलर ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। इससे ये साफ है कि भारत में कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदार्थों का संकट नहीं होने वाला। बता दें कि फरवरी में भारत ने रूस से कम कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन ईरान युद्ध में ऊर्जा संकट से बचने के लिए रूस से फिर बड़ी खरीदारी की गई। वैसे भी अमेरिका ने रूस का कच्चा तेल खरीदने पर लगी रोक को एक महीने के लिए हटा दिया है।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से जमकर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। उस वक्त रूस ने भारत को कच्चे तेल की खरीद पर प्रति बैरल 2 से 2.5 डॉलर की छूट भी दी थी। अब ईरान युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की काफी कमी हो गई है। भारत हर महीने अपने कुल कच्चे तेल के आयात का 45 फीसदी होर्मुज स्ट्रेट के जरिए मंगाता रहा है। हाल ही होर्मुज में फंसे भारत के पांच जहाज एलपीजी और कच्चा तेल लेकर भारत आए हैं। जबकि, बीते दिनों चीन जा रहे रूस के कच्चे तेल से भरे जहाज को भी मेंगलुरु बंदरगाह की ओर डायवर्ट किया गया था। ऐसे में साफ है कि अगर ईरान युद्ध जारी रहता है, तो रूस से भारत कच्चे तेल की बड़ी खेप खरीदता रह सकता है।
