May 18, 2026

Hind foucs news

hindi new update

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों ने काटे और 13 लाख वोटरों के नाम, वोटर लिस्ट से अब तक 70 लाख से ज्यादा लोग बाहर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बड़ी तादाद में वोटरों के नाम हट गए हैं। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद करीब 58 लाख वोटरों के नाम चुनाव आयोग ने हटा दिए थे। इनके अलावा 60 लाख 6 हजार 675 वोटरों के बारे में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी मिलने पर उनको नोटिस जारी कर न्यायिक अधिकारियों को फैसला लेने का जिम्मा सौंपा गया था। न्यूज चैनल आजतक ने चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अफसर के हवाले से बताया है कि न्यायिक अधिकारियों ने भी और 13 लाख वोटरों के नाम काट दिए हैं।

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की टीएमसी ने एसआईआर पर सवाल खड़ा किया है। ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी से मिलकर चुनाव आयोग टीएमसी के वोटरों के नाम काट रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले 60 लाख से ज्यादा वोटरों के बारे में फैसला करने के लिए पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों को लगाया। इन न्यायिक अधिकारियों ने अब तक 32 लाख वोटरों के मामले निपटाए हैं। इन्हीं में से 13 लाख वोटरों के नाम कटे हैं। जिन वोटरों का नाम काटा गया है, वे अब न्यायिक ट्रिब्यूनल में ऑनलाइन या ऑफलाइन अपील कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में ऐसे 19 ट्रिब्यूनल बनाए हैं।

न्यायिक अधिकारियों को अभी पश्चिम बंगाल में और 28 लाख वोटरों के मामलों पर विचार करना है। ऐसे में और भी लाखों वोटरों के नाम कटने के पूरे आसार हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी लगातार ये आरोप लगाती रही है कि ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या को अवैध तौर पर शरण देकर उनको अपने वोटर के तौर पर इस्तेमाल करती है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना रखा है। वहीं, ममता बनर्जी ने बीते दिनों अपने धरने के दौरान कहा था कि अगर उनकी सरकार कभी चली गई, तो एक कम्युनिटी एक सेकेंड में बारह बजा देगी। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में सियासत गर्माई हुई है। यहां 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग और 4 अप्रैल को वोटों की गिनती होनी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *