लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव को फिर झटका, सीबीआई एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज
नई दिल्ली। लैंड फॉर जॉब केस में आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव को एक बार फिर से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने उनके और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज सीबीआई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने लालू प्रसाद यादव को एक राहत भी दी है। शीर्ष अदालत बेंच ने केस सुनवाई के दौरान निचली अदालत में लालू यादव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। इसी के साथ निचली अदालत को मामले की मेरिट की जांच करने का अधिकार दिया।
इससे पहले लालू यादव की ऐसी ही याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में भी खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे वक्त पर लालू याचिका की याचिका खारिज की है जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इसी साल जनवरी में सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके दोनों बेटों पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और पूर्व मंत्री तेज प्रताप, दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 40 लोगों पर आरोप तय किए थे। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया जमीन के बदले नौकरी देने की साजिश के संकेत मिल रहे हैं। लालू यादव और उनके परिवार ने आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया।
गौरतलब है कि यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल 2004 से 2009 के बीच का है यह मामला है उस वक्त लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियों में भर्ती के बदले अभ्यर्थियों की जमीन सस्ते दामों पर ले ली गई थी। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया था। जिसमें से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। आरोपियों में से 38 वो लोग थे जिन्होंने जमीन देकर नौकरी पाई थी। न्यायाधीश विशाल गोगने ने 52 आरोपियों को बरी कर दिया था।
