द्रविड़ अस्मिता का झंडा उठाने और हिंदी व सनातन धर्म के खिलाफ बयान देने के बावजूद तमिलनाडु में डूबी डीएमके की नैया
चेन्नई। पश्चिम बंगाल में जहां टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को जोर का झटका लगा है। वहीं, दक्षिण के अहम राज्य तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके के सुप्रीमो एमके स्टालिन की सियासी जमीन इस बार हिल गई है। एमके स्टालिन को उम्मीद थी कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में दोबारा डीएमके को जीत मिलेगी और वो फिर सीएम बनेंगे। इसके लिए स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि और डीएमके के तमाम नेताओं ने द्रविड़ अस्मिता, हिंदी और सनातन धर्म के खिलाफ तमाम बयान दिए। हालांकि, डीएमके नेताओं के बयान तमिलनाडु में पार्टी की नैया डूबने से नहीं बचा सके।
अब देखते हैं कि एमके स्टालिन, उदयनिधि और डीएमके के नेताओं ने कौन से बयान दिए थे। डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी कोई जगह नहीं होगी। जब भी हिंदी थोपी जाएगी, उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने नई शिक्षा नीति में हिंदी को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर इसे भारत की आत्मा पर हमला बताया था। स्टालिन की पार्टी के लोकसभा सांसद दयानिधि मारन ने साल 2019 में कहा था कि हिंदी भाषी लोग तमिलनाडु में सड़क और शौचालय साफ करने का काम करते हैं। जबकि, अंग्रेजी जानने वाले अच्छी नौकरी पाते हैं। दयानिधि के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने कई बार सनातन धर्म के बारे में बयान देकर विवाद पैदा किया। उदयनिधि ने 2023 में सनातन धर्म को सामाजिक समानता के खिलाफ बताकर इसकी तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की थी। उन्होंने सनातन को खत्म करने का बयान दिया था। यहां तक कि मद्रास हाईकोर्ट ने इसे हेट स्पीच कहा था।
डीएमके के सांसद ए. राजा ने कहा था कि हिंदू धर्म सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है। वहीं, उन्होंने हिंदू धर्म में रहने वालों को शूद्र कहकर विवाद पैदा किया था। ए. राजा ने रामायण पर भी टिप्पणी की थी। डीएमके सांसद ने कहा था कि वो रामायण नहीं मानते। भगवान राम के बारे में भी उन्होंने विवादित बात कही थी। वहीं, स्टालिन सरकार में मंत्री के. पोनमुडी ने हिंदुओं के तिलक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद उनको उप महासचिव पद से हटा दिया गया था। डीएमके सांसद डीएनवी सेंथिलकुमार ने लोकसभा में बयान देते हुए हिंदी भाषी राज्यों को गौमूत्र राज्य कहा था। बाद में उन्होंने ऐसा कहने पर माफी मांगी थी। इतना ही नहीं, डीएमके सरकार पर तमिलनाडु में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप भी लगा था। हालांकि, डीएमके ने हमेशा ये भी कहा कि वो किसी धर्म के खिलाफ नहीं। सिर्फ जाति आधारित भेदभाव और हिंदी थोपने के खिलाफ है।
