बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों को साथ आने के ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर भड़की कांग्रेस और सीपीएम
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी से घोर पराजय के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सभी विपक्षी दलों को साथ आने और एकजुट होने का प्रस्ताव दिया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि उनको लेफ्ट, अल्ट्रा लेफ्ट समेत बीजेपी विरोधी हर दल से गठजोड़ करने में कोई दिक्कत नहीं है। नवभारत टाइम्स अखबार के मुताबिक ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर सीपीएम और कांग्रेस भड़की हैं। दोनों पार्टियों की प्रतिक्रिया ममता बनर्जी की अपील पर फिलहाल पानी फेरती दिख रही हैं।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि ममता बनर्जी ने राज्य में कांग्रेस और सेक्युलर पार्टियों को मिटाने की भरपूर कोशिश की। अधीर रंजन ने कहा कि अब जब ममता को इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है, तो ताकत खत्म होने के कारण वो समर्थन मांग रही हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अगर ममता बनर्जी सिर्फ राहुल गांधी को ही इंडी गठबंधन का नेता मान लें, तो हम कुछ सोच सकते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल कांग्रेस की प्रवक्ता सौम्या रॉय ने कहा कि कानों पर भरोसा नहीं हो रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी ने अल्ट्रा लेफ्ट को भी साथ आने का प्रस्ताव दिया है। अल्ट्रा लेफ्ट से क्या मतलब? क्या ममता बनर्जी माओवादियों की बात कर रही हैं?
वहीं, जिस सीपीएम के खिलाफ माहौल बनाकर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई थीं, उसने भी टीएमसी सुप्रीमो की अपील पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सीपीएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर बीजेपी से लड़ने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाएगा। सीपीएम नेता ने कहा कि पार्टी को ऐसा कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं है, जिसकी पहचान अपराधी, लुटेरी, भ्रष्ट और सांप्रदायिक हो। ऐसे में साफ है कि फिलहाल ममता बनर्जी के साथ इंडी गठबंधन के कांग्रेस और वामदल नहीं आने वाले। दरअसल, जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में थीं, तो सभी चुनावों में उन्होंने किसी और विपक्षी दल से सीटों का बंटवारा नहीं किया। यहां तक कि इस बार कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सभी 294 सीट पर प्रत्याशी उतारे थे। सीपीएम ने भी अलग चुनाव लड़ा था।
