पश्चिम बंगाल में गाय-भैंस का वध करना अब आसान नहीं, शुभेंदु सरकार ने लिया बड़ा फैसला
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अब गोवंश को यूं ही मारा नहीं जा सकेगा। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आदेश जारी किया है कि पश्चिम बंगाल के लोग अब अपनी मर्जी से गाय, बैल, भैंस और बछड़े को नहीं मार सकेंगे। पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण एक्ट के प्रावधानों को शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। नए नियम के तहत कोई भी व्यक्ति गाय, बैल, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया भैंस को तभी मार सकेगा, जबकि उसे ये सर्टिफिकेट मिल जाए कि संबंधित पशु मारे जाने योग्य है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने कहा है कि पशु वध के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 अगस्त 2018 के फैसले और फिर 8 जून 2022 को जारी सरकार के निर्देश का कड़ाई से पालन हो। पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने कहा है कि किसी पशु के वध के लिए नगर पालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति के साथ ही सरकारी पशु चिकित्सक से संयुक्त सर्टिफिकेट लेना होगा। इस सर्टिफिकेट में बताया जाएगा कि जिस पशु का वध करना है, वो 14 साल से ज्यादा उम्र, चोट या असाध्य रोग से स्थायी तौर पर अक्षम हो गया है। अगर ये सर्टिफिकेट जारी करने से मना किया जाता है, तो पशु वध चाहने वाला 15 दिन में राज्य सरकार के सामने अपील कर सकता है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि जिस पशु के बारे में सर्टिफिकेट जारी होगा, उसका वध सिर्फ नगर निगमों के वधगृह या उस जगह के प्रशासन की ओर से तय वधगृह में ही किया जा सकेगा। सरकार ने कहा है कि पशु वध संबंधी नए नियम न माने पर 6 महीने कैद की सजा या 1000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा। अवैध रूप से पशु वध करने को इससे संबंधित एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध माना जाएगा। शुभेंदु अधिकारी सरकार के इस ताजा कदम से राज्य में सियासत गर्मा सकती है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में तमाम लोग ऐसे हैं, जो गोवंश या भैंस का मांस खाते हैं। अब पशु वध के लिए सर्टिफिकेट जरूरी किए जाने से इनका मांस आसानी से उपलब्ध होना मुश्किल हो जाएगा।
