क्या कांग्रेस से दशकों पुराना नाता तोड़ने का मन बना रहे हैं मनीष तिवारी? सोशल मीडिया पोस्ट से लग रहे कयास
नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव किए बिना संगठनात्मक स्तर कई नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। हालांकि वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी का नाम इसमें कहीं नहीं है। इसको लेकर अब मनीष तिवारी ने जो प्रतिक्रिया दी है उससे उनकी नाराजगी झलक रही है और ऐसी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या मनीष कांग्रेस से अलग होने का मन बना रहे हैं। दरअसल, द हिंदू अखबार ने ‘पंजाब में कांग्रेस के नए कार्यकारी अध्यक्ष और चुनाव आयोगों की नियुक्ति के बाद मनीष तिवारी हाशिए पर चले गए’ हेडिंग के साथ आर्टिकल छापा। मनीष ने इसी पर प्रतिक्रिया दी है।
मनीष तिवारी ने एक्स पर लिखा, है बड़ा कोई अवगुण उसमें जिसे कोई हुनर आवे I काश मेरे पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता। लेकिन फिर भी, मैं कहूंगा कि कांग्रेस ने मुझे पिछले 45 सालों में बहुत कुछ दिया है और मैंने दशकों से अपना पूरा वयस्क जीवन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में समर्पित किया है। जो होगा सो होगा…।
आपको बता दें कि कांग्रेस ने एक दिन पहले ही यह स्पष्ट किया है कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता पद की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। इनके अलावा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने प्रदेश चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का अध्यक्ष जबकि सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर समिति का प्रमुख बनाया गया है। मैनिफेस्टो समिति की जिम्मेदारी डॉ. अमर सिंह को दी गई है।
