क्या टीएमसी और उसका सिंबल गंवा देंगी ममता बनर्जी?, चुनाव आयोग से मिलकर दावा करेंगे बागी विधायक
नई दिल्ली। ममता बनर्जी की टीएमसी की अंदरूनी जंग अब दिल्ली पहुंच गई है। बड़ी तादाद में विधायकों के साथ ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत करने वाले ऋतब्रत बनर्जी दिल्ली पहुंचे हैं। ऋतब्रत बनर्जी अब खुद के गुट के असली टीएमसी होने का दावा चुनाव आयोग से करेंगे और पार्टी का सिंबल उनके गुट को देने की मांग वो रखने वाले हैं। ऋतब्रत का दावा है कि ममता की टीएमसी के 80 में से 64 विधायक उनके साथ हैं।
ऋतब्रत बनर्जी और टीएमसी के एक अन्य विधायक संदीपन साहा ने पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी कि शोभनदेव चटर्जी को नेता विपक्ष बनाने के जिस प्रस्ताव को ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भेजा, उसमें 14 विधायकों के दस्तखत फर्जी हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस से जांच करने के लिए कहा। फिलहाल पश्चिम बंगाल सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है। सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की है और टीएमसी के केंद्रीय दफ्तर पर छापा भी मारा था। ऋतब्रत और संदीपन की ओर से ये शिकायत किए जाने के बाद ममता बनर्जी ने दोनों को टीएमसी से निकाल दिया था।
टीएमसी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पार्टी के ज्यादातर विधायकों को साथ जुटा लिया। जिसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत को नेता विपक्ष का दर्जा दे दिया। उधर, ममता बनर्जी की पार्टी के 28 में से 21 सांसदों ने अलग बगावत की। इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ज्वॉइन कर ली और केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए को समर्थन देने का एलान कर दिया। ऐसे में ममता बनर्जी अगर पार्टी का नाम और सिंबल गंवाती हैं, तो ये उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने ममता की 15 साल पुरानी सरकार को बाहर का रास्ता दिखाया था। जिसके बाद से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर कई केस भी दर्ज हो चुके हैं।
