राम मंदिर चंदा चोरी में अब एसआईटी की नजर स्टेट बैंक की तरफ मुड़ी, अफसरों से होगी पूछताछ
अयोध्या। राम मंदिर चंदा चोरी केस की जांच कर रही एसआईटी की नजर अब स्टेट बैंक की ओर मुड़ गई है। बताया जा रहा है कि एसआईटी अब स्टेट बैंक के अफसरों से पूछताछ करने वाली है। इसकी वजह राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का एसआईटी को दिया बयान है। चंपत राय ने अपने बयान में ट्रस्टी अनिल मिश्र के साथ स्टेट बैंक के अफसरों पर भी अंगुली उठाते हुए एसआईटी से जांच का आग्रह किया है। ऐसे में स्टेट बैंक के अफसर भी एसआईटी जांच के दायरे में आ गए हैं।
एसआईटी की जांच में पता चला है कि अनिल मिश्र राम मंदिर में के वित्तीय मामलों और चढ़ावे में आने वाली नकदी का मामला देखते थे। अनिल मिश्र ने स्टेट बैंक के साथ इस बारे में एमओयू किया था। अनिल मिश्र और स्टेट बैंक के अफसरों पर चंपत राय ने आरोप लगाया है कि उन्होंने तय किए एसओपी का पालन नहीं किया। जिसकी वजह से राम मंदिर में चंदा चोरी हुई। चंपत राय ने बयान में कहा है कि रकम की काउंटिंग करने वाले कर्मचारियों को बैंक ने जेब वाली ड्रेस दी। इनको हाउस कीपिंग के नाम पर रखा गया। बायोमेट्रिक अटेंडेंस और भीतर जाने और निकलते वक्त तलाशी नहीं ली गई। चंपत राय ने बयान में इन सबके लिए अनिल मिश्र के साथ ही बैंक के अफसरों को भी जिम्मेदार बताया है। एसओपी पर 6 फरवरी 2025 को अनिल मिश्र और अयोध्या में स्टेट बैंक की मेन ब्रांच के चीफ मैनेजर गोविंद मिश्र ने दस्तखत किए थे।
उधर, राम मंदिर चंदा चोरी केस की जांच में अयोध्या पुलिस भी सक्रिय है। पुलिस ने राम मंदिर में चंदा चोरी के गिरफ्तार 8 आरोपियों में से अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडे की कस्टडी ले रखी है। इन सभी को पुलिस बुधवार को उस जगह ले गई, जहां रकम का बंटवारा किया जाता था। इसके अलावा पुलिस इनसे पूछताछ कर ये जानने की कोशिश कर रही है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में और कौन-कौन संलिप्त है। इससे पहले पुलिस ने चंदा चोरी के एक और आरोपी अविनाश शुक्ल को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। जांच के दौरान ये खुलासा भी हुआ है कि आरोपियों ने राम मंदिर ट्रस्ट के नाम और लोगो लगाकर फर्जी रसीद बुक छपवाई थी। जिसके जरिए वे राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से भी रकम ले लेते थे।
