सरकार–सीजेपी वार्ता निर्णायक मोड़ पर, मुआवजा और मुकदमे वापसी पर सकारात्मक संकेत; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा संगठन
रविन्द्र बंसल-
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे सीजेपी के आंदोलन के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता ने पूरे घटनाक्रम को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। लगभग दो घंटे चली बातचीत में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे, मृतक छात्रों के परिजनों को मुआवजा, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और आंदोलन समाप्त करने के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि सबसे संवेदनशील मुद्दे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। बैठक में सरकार की ओर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए। वहीं सीजेपी की ओर से मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संगठन का पक्ष रखा।
सीजेपी ने सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान सीजेपी प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन केवल मुआवजे का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का आंदोलन है। संगठन ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं—
आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर और मुकदमे वापस लिए जाएं।
मृतक छात्रों के परिजनों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाए।
घायल छात्रों के समुचित इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था हो।
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए जाएं।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
मुआवजा और मुकदमे के मुद्दे पर सकारात्मक रुख
बैठक के बाद सीजेपी नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने तथा निर्दोष छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के संबंध में सकारात्मक रुख दिखाया है। मुआवजे के मुद्दे पर भी सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आश्वासन दिया गया। हालांकि इन बिंदुओं पर अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक लिखित घोषणा नहीं की गई है।
इस्तीफे के मुद्दे पर नहीं बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार सबसे लंबी चर्चा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर हुई। सीजेपी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सरकार ने इस विषय पर तत्काल निर्णय देने से इनकार करते हुए विचार-विमर्श के लिए शनिवार तक का समय मांगा।
सीजेपी का संदेश—‘आंदोलन जारी रहेगा’
बैठक के बाद मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने कई मुद्दों पर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन आंदोलन का मूल उद्देश्य जवाबदेही तय कराना है। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफे के मुद्दे पर संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपना लोकतांत्रिक अधिकार प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से वार्ता को केवल औपचारिकता न बनाकर ठोस निर्णय लेने की अपील की।
सरकार ने भी बनाए रखा संवाद का रास्ता
सरकार की ओर से संकेत दिए गए कि बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा और टकराव के बजाय समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना गया है और विभिन्न मांगों पर संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर विचार किया जा रहा है।
अब सबकी नजर शनिवार पर
राजनीतिक और छात्र संगठनों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के प्रश्न पर कोई निर्णय नहीं होता, तो सीजेपी आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति अपना सकता है। वहीं यदि सरकार कोई ठोस घोषणा करती है, तो लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने की संभावना भी बन सकती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वार्ता से टकराव कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अंतिम समझौते की कुंजी अभी भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे में ही छिपी हुई है।
