महागठबंधन राज में बिहार में अंधेरगर्दी: नौकरी मांगने पर ADM ने क्रूरता की सारी हदें कर दी पार, तिरंगा का भी सरेआम किया अपमान
नई दिल्ली। अरे ये क्या हो रहा है बिहार में और क्यों हो रहा है और अगर ऐसा कुछ हो रहा है, तो इसका जिम्मेदार कौन है, अरे नहीं..नहीं, जिम्मेमदार कहना मुनासिब नहीं होगा यहां, बल्कि ये कहिए कि इन सबका कसूरवार कौन होगा। जी हां….तो अगर अभी तक आपको नहीं पता कि बिहार में क्या हो रहा है, तो पहले तो तफसील से जान लीजिए।
दरअसल, सीएम नीतीश ने बीजेपी से अपने तमाम सियासी रिश्तों को तिलांजलि देने के बाद राजद के साथ हाथ मिलाया। काफी अर्से बाद कुर्सी मिली तो राजद वाले खुशी से फुले नहीं समाए और तेजस्वी यादव कुर्सी पर विराजमान होने के बाद इतने प्रफुल्लित हो गए कि उन्होंने बिहार में लाखों युवाओं को नौकरी देने का वादा कर दिया, वो भी सरकारी, लेकिन बिहार में नौकरी मिलना दुष्कर ही नहीं, बल्कि अब तो गुनाह भी गया है। जी हां….अगर बिहार में मौजूदा हुकूमत से आपने नौकरी मांग ली तो आपको पुलिसकर्मियों की लाठियां खानी पड़ जाएंगी, इसलिए बेशक वो आपसे वोट मांगे तो ठीक है, लेकिन आप उनसे नौकरी मांगने की हिमाकत मत कर लीजिएगा, नहीं तो आपको चुकानी पड़ जाएगी कीमत, वो भी भारी, जैसा कि वर्तमान में बिहारी युवाओं की चुकानी पड़ रही है।
अब इतना सबकुछ पढ़ने के बाद अगर अभी- भी आपको हमारी बातों पर यकीन ना हो रहा हो, तो चलिए हमारे साथ राजधानी पटना जहां युवाओं ने नीतीश सरकार से नौकरी क्या मांग ली। उन्हें तो पुलिस की लाठियां खानी पड़ गई। किसी पुलिसकर्मी ने युवाओं को दौड़ा कर पीटा तो किसी ने बैठा कर तो किसी ने लिटाकर तो किसी सुलाकर। अब आप ही बताइए कि बिहार के युवा अगर नौकरी मांगने नीतीश कुमार से पास नहीं जाएंगे तो क्या जो बाय़डन के पास जाएंगे। अरे भईया हम बिहारी हैं। बिहार में वोट देते हैं। हमारे ही रहमोकरम पर नीतीश जी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए हैं। अब वो अलग बात है कि ये वोट तो जदयू और बीजेपी के नाम था, लेकिन नीतीश बाबू ने बीजेपी को गच्चा देकर राजद संग सरकार बना ली। राजद संग हाथ मिलाते ही उन्हें बेरोजगारी, गरीबी और भ्रष्टाचार की याद सताने लगी। कहा कि सरकार काम नहीं कर पा रही है, इसलिए हमने राजद संग हाथ मिलाया है, लेकिन इस हाथ का क्या फायदा जब बिहार के युवाओं को नौकरी मांगने के लिए पुलिस की लाठियां खानी पड़ रही हैं।
चलिए, छोड़िए, उन बातों को, वैसे भी अब इस देश में नौकरी मांगने पर पुलिस की लाठियां खाना युवाओं का जन्मसिद्ध अधिकार हो गया है। तो उसमें ज्यादा हैरान होने वाली बात नहीं है। लेकिन, जरा तेजस्वी यादव की उन बातों को याद करिए, जब उन्होंने अपनी छाती चौड़ी करके पहली कैबिनेट बैठक संपन्न होते ही कहा था कि 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी और अब जब युवा नौकरी मांग रहे हैं, तो उन्हें बदले में क्या दिया जा रहा है, सिर्फ और सिर्फ पुलिस की लाठियां।
चलिए ,छोड़िए, साहब, इसे भी छोड़ दीजिए, जरा नीचे हमने जो वीडियो लगाई है, उसे देखिएगा, ना खून खौल गया आपको तो हमसे कहिएगा। एक शख्स हाथ में तिरंगा लेकर बिहार सरकार से नौकरी मांग रहा थे, लेकिन एडीएम साहब तो लाठियां भांजने में मशगूल थे। ये तक नहीं देखा कि बच्चे के हाथ में तिरंगा है। उस बच्चे का नहीं तो कम से हमारे तिरंगा का ही सम्मान कर लेते। ये खाकीवर्दी क्या भारत सरकार ने महज लाठियां बरसाने के लिए ही दी है। हालांकि, इस बात में कितना सच है और कितना झूठ है, यह तो फिलहाल कह पाना मुश्किल है, लेकिन खबर है कि एडीएम की इस करतूत के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हम तो कहेंगे कि उस एडीएस के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए कि हिंदुस्तान का कोई भी शख्स तिरंगे का अपमान करने के बारे में एक नहीं, हजार मर्तबा सोचे।
अब जाते-जाते कुछ सवाल सुशासन बाबू से भी कर लेते हैं। पलटू चाचा की तो मजे में कट रही होगी। पलट़ू वाली अपनी छवि को चरितार्थ करते हुए जिस तरह से उन्होंने राजद के साथ हाथ मिलाया है , उससे साफ जाहिर होता है कि वे चतुर सियासतदान हैं , लेकिन बिहार के इन युवाओं का क्या होगा, जो कि उनसे नौकरी मांग कर रहे हैं और बदले में उनके पुलिसवाले उन्हें क्या दे रहे हैं, सिर्फ और सिर्फ लाठियां। बहररहाल, अब यह पूरा माजरा आगामी दिनों में क्या रुख अख्तियार करता है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
