June 26, 2026

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जेल में बंद नवजोत सिंह सिद्धू की जान को खतरा!, सुपरिटेंडेंट को चिट्ठी लिखकर मांगी सुरक्षा

नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रह चुके नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय जनता पार्टी में भी रह चुके हैं। सिद्धू, कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में बतौर जज नजर आ चुके हैं। इसके अलावा वो खेल जगत की दुनिया का भी जाना माना नाम हैं। भारतीय क्रिकेट टीम में रहते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने खेल से लोगों को दीवाना बनाया।

कमेंटेटर के रूप में भी नवजोत सिंह सिद्धू ने लोगों का मनोरंजन किया लेकिन फिलहाल वो जेल में बंद हैं। सिद्धू 1988 के एक रोडरेज मामले में 1 साल की सजा काट रहे हैं। जेल में बंद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी जान को खतरा बनाता है। जान जाने के डर से सिद्धू से भोजन खाने से भी मना कर दिया। भूखे रहने की वजह से उनकी हालत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। सिद्धू ने जेल प्रशासन को चिट्ठी लिख सुरक्षा की मांग की है।

बता दें, सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने 1988 के रोडरेज मामले में पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के लिए 1 साल की सजा मुकर्रर की है। सिद्धू पर आरोप था कि उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक शख्स की पिटाई कर दी थी। इस पिटाई से घायल हुए युवक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। हालांकि बाद में ये बात भी सामने आई थी कि शख्स की जान हार्ट अटैक आने की वजह से गई थी। सिद्धू इसी की सजा जेल में काट रहे हैं।

अब रोडरेज मामले में पंजाब की पटियाला जेल में बंद सिद्धू ने अपनी जान को खतरे की आशंका जताई है। सिद्धू ने जेल प्रशासन को इसके लिए पत्र भी लिया है। इससे पहले सिद्धू की इसी साल मई महीने में तबीयत बिगड़ गई थी। उस वक्त हुआ ये था कि सिद्धू ने जेल की दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया था। सिद्धू ने कहा था कि उन्हें गेहूं से एलर्जी है, ऐसे में उन्होंने जेल का खाना छोड़ केवल सलाद खाकर गुजारा करना शुरू कर दिया। इसका असर उनकी सेहत पर दिखा और वो बीमार हो गए। उन्हें पटियाला के राजिंद्र हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां 4 घंटों तक उनका चेकअप हुआ। बाद में उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई है सजा

जानकारी के लिए बता दें कि सिद्धू को इस मामले में निचली अदालत से राहत मिल गई थी। हालांकि हाई कोर्ट ने मामले में 3 साल कैद की सजा सुनाई। जिसके बाद सिद्धू ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए नवजोत सिद्धू पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट के इस फैसले से नाराज पीड़ित के परिजनों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की मांग कि जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई थी।

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