June 25, 2026

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जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, SIA ने जमात ए इस्लामी की 11 संपत्तियां की जब्त

नई दिल्ली। एक तरफ जहां केंद्र सरकार का दावा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने के बाद आतंकवाद की कमर टूटी है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र द्वारा किए जा रहे दावे पूरी तरह से खोखले हैं। उनमें कोई सच्चाई नहीं है। असल सच्चाई यह है कि आज भी घाटी में आतंकवाद का दबदबा है। लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। खैर, कोई कुछ भी कहे, लेकिन घाटी से समय-समय पर आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की खबर प्रकाश में आती रहती है। अब इसी बीच अनंतनाग से आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। आइए, आगे आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के जिला अनंतनाग में एनआईए ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। खबर है कि जांच एजेंसी ने जमात ए इस्लामी की संपत्तियों को जब्त किया है। आतंकी संगठन के कुल 11 संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा यह संपत्तियां अनंतनाग जिले में प्रतिबंधित संगठन जमात ए इस्लामी से जुड़ी बताई जा रही हैं। हालांकि, यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कि जब घाटी में आतंकवाद के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की गई थी, बल्कि इससे पहले भी शोपिया में आतंकी संगठन की संपत्तियों को जब्त कर लिया गया था। बताया जा रहा है कि आगामी दिनों में जांच एजेंसी की तरफ से आतंकी संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाती है। बहरहाल, अब आगामी दिनों में क्या कुछ कार्रवाई की जाती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

वहीं, घाटी में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की रूपरेखा की बात करें, तो मोदी सरकार के मुताबिक आतंकियों की कमर तोड़ने की दिशा में कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो कि काफी कारगर साबित हुए हैं। बता दें कि केंद्र सरकार का दावा है कि नोटबंदी के बाद घाटी में आतंकी गतिविधियों में भी खासी गिरावट देखने को मिली है। इसके अलावा आतंकियों की कमर तोड़ने की दिशा में अनुच्छेद 370 को निरस्त करना मील का पत्थर साबित हुआ है। लेकिन, विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए नजर आ रहे हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि आज भी घाटी में युवाओं के आतंकी संगठनों में भर्ती होने का सिलसिला जारी है, जबकि केंद्र का दावा है कि आज की तारीख में घाटी में युवाओं को रोजगार मिल रहा है, तो कोई उच्छ शिक्षा ग्रहण कर रहा है। आज घाटी में स्थिति पहले जैसी नहीं है। अब ऐसी स्थिति में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किनके दावों में दम है? यह चर्चा का विषय है।

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