July 15, 2026

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तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर नहीं लगेगा बैन, SC का रोक से इंकार

नई दिल्ली। तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर बैन लगाने से साफ इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ का यहा फैसला सुनाया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में जल्लीकट्टू पर कई याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद ये भी साफ हो गया है कि जल्लीकट्टू जानवरों के प्रति क्रूरता नहीं करता है। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (तमिलनाडु संशोधन) अधिनियम, 2017, जानवरों के दर्द और पीड़ा को काफी हद तक कम करता है। हालांकि जल्लीकट्टू को लेकर फैसला पहले ही ले लिया गया था। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के कानून को सही मानते हुए इस खेल पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया।

बता दें कि जानवरों के प्रति क्रूरता की बात करते हुए याचिका दायर की गई थी। इसके साथ ही जल्लीकट्टू पर बैन लगाने की मांग की गई थी। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में जल्लीकट्टू पर सुनवाई हुई थी और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि ये तमिलनाडु के सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। जिस आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जल्लीकट्टू को सही माना है। जस्टिस एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने ये फैसला सुनाया है और सर्वसमिति से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लिया है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तमिलनाडु के कानून मंत्री एस रघुपति का रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, ”हम कानूनी लड़ाई जीते हैं। तमिलनाडु के लोगों की यह इच्छा थी, वो जल्लीकट्टू खेल को जारी रखना चाहते थे। हमारी संस्कृति, परंपरा सब कुछ संरक्षित किया गया है।”

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