बिहार में जातिगत सर्वे पर फिर गरमाई सियासत, नीतीश सरकार से बीजेपी ने रखी आर्थिक स्थिति के आंकड़े जारी करने की मांग
पटना। बिहार में एक बार फिर जातिगत सर्वे को लेकर सियासत गरमा गई है। बिहार विधानसभा का सत्र आज से शुरू हो रहा है। इस सत्र में नीतीश कुमार की सरकार जातिगत सर्वे की रिपोर्ट को रख सकती है। सूत्रों की मानें, तो जातिगत सर्वे की रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर बिहार में तमाम समुदायों के लिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने पर नीतीश कुमार की सरकार जोर देगी। वहीं, विपक्षी बीजेपी ने नीतीश कुमार सरकार से मांग की है कि वो बिहार विधानसभा में सभी जातियों की आर्थिक स्थिति के आंकड़े जारी करे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को ही जातिगत सर्वे के मामले में नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साध चुके हैं। अमित शाह ने कहा था कि इस सर्वे के आंकड़े गलत हैं, क्योंकि इसमें मुस्लिम और यादवों को ज्यादा दिखाया गया है। जबकि, अतिदलितों और अति पिछड़ों की संख्या घटाकर बताई गई है।
केंद्र की मोदी सरकार ने अब तक भले ही जातिगत जनगणना का फैसला नहीं किया, लेकिन नीतीश कुमार सरकार ने बिहार में जातिगत सर्वे कराया था। इस सर्वे पर रोक लगाने के लिए पटना हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी अर्जी दाखिल हुई थी। दोनों अदालतों ने इन अर्जियों को खारिज कर दिया और सर्वे पर रोक नहीं लगाई। इसके बाद नीतीश सरकार ने जातिगत सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी थी। सितंबर महीने में सार्वजनिक की गई बिहार के जातिगत सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया था कि राज्य में अलग-अलग समुदायों के कितने फीसदी लोग बसते हैं। अब बीजेपी इसी सर्वे में लिए गए आर्थिक आंकड़ों को पेश करने की मांग नीतीश कुमार सरकार से कर रही है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा भी हो सकता है। देखना ये है कि आर्थिक स्थिति के आंकड़े नीतीश सरकार विधानसभा में रखती है, या सिर्फ उतनी ही रिपोर्ट देती है, जिसे उसने सार्वजनिक किया था।
बिहार में जातिगत सर्वे के नतीजों को सार्वजनिक करते हुए नीतीश कुमार की सरकार ने बताया था कि राज्य में भूमहारों की आबादी 2.86 फीसदी, ब्राह्मणों की आबादी 3.66 फीसदी, कुर्मियों की आबादी 2.87 फीसदी, मुसहरों की आबादी 3 फीसदी, यादवों की आबादी 14 फीसदी, राजपूत की आबादी 3.45 फीसदी और मुस्लिमों की आबादी 17.70 फीसदी है। इस सर्वे के मुताबिक बिहार में सबसे ज्यादा 63 फीसदी लोग पिछड़े समुदाय के हैं। जबकि, 36 फीसदी आबादी अति पिछड़ों में गिनी गई थी। सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि विधानसभा में वो सर्वे के नतीजों की जानकारी देंगे।
